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Sitapur News: नैमिष में श्राद्ध करने पर देवताओं का मिलता आशीर्वाद

Thu, 28 Sep 2023 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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नैमिषारण्य/सीतापुर। पितृ पक्ष शुक्रवार से शुरू हो रहे हैं। पितृ पक्ष में पुरखों का श्राद्ध, पिंडदान व तर्पण करने से उन्हें मुक्ति मिलती है। पितृ पक्ष में देश-विदेश से लोग अपने पूर्वजों की तृप्ति के लिए नैमिष आते हैं। यहां के काशी कुंड तीर्थ में श्राद्ध व तर्पण करते हैं।
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इस तीर्थ को नाभि गया के नाम से भी जाना जाता है। पितरों की तृप्ति के लिए नैमिषारण्य तीर्थ को प्रधान माना गया है। मान्यता है, कि जो व्यक्ति धन व समय के अभाव में पितृकार्य के लिए बद्रीनाथ, गयाजी नहीं जा पाते हैं, वह नैमिषारण्य स्थित नाभि गया, काशी कुंड तीर्थ पर श्राद्ध कर्म व पिंडदान करते हैं। शास्त्रानुसार अश्वनी माह के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष कहा जाता है। यह पक्ष खासतौर से पितरों के लिए आरक्षित है। 15 दिन तक चलने वाले पितृ पक्ष इस वर्ष 29 सितंबर से प्रारंभ होंगे। शास्त्रों में कहा गया है, कि देवकार्य करने में भूल हो जाए तो क्षमा है, मगर पितरों का कार्य न करने से पितृदोष लगता है।

नैमिषारण्य नाभिगया का पौराणिक महत्व
पौराणिक ग्रंथों में तीन गया बताई गई हैं। नैमिषारण्य नाभि गया, बद्रीनाथ में कृपाल गया, बिहार में चरण गया। नैमिषारण्य में 33 करोड़ देवी-देवता और 88 हजार ऋषि विराजमान रहते हैं। यहां पितरों का कार्य करने वालों को देवता और ऋषिगण आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
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ऐसे करें तर्पण
आचार्य रमेश चन्द्र शास्त्री ने बताया तर्पण करने वाले को सर्वप्रथम देवताओं के लिए तर्पण करना चाहिए। यह तर्पण पूरब दिशा में मुख करके करना चाहिए। जल में हाथ डालकर हाथों के अग्रभाग से जल गिराना चाहिए। इसके बाद ऋषियों के निर्मित तर्पण करना चाहिए। ऋषियों को चावल डालकर कंठी की तरह यज्ञोपवीत करने के बाद उत्तर दिशा की तरफ मुख करके तर्पण करना चाहिए। पितरों को अंगूठा व तर्जनी के मध्य से जौं डालकर तर्पण करना चाहिए। तर्पण के समय दक्षिण की ओर मुख होना चाहिए और यज्ञोपवीत व गमछा दाहिने कंधे पर होना चाहिए। इसके बाद एक अंजलि जल भीष्म पितामह के निर्मित जल देना उत्तम होता है।


पितृ पक्ष में दान करने का महत्व
मान्यता है, कि ब्राह्मण के माध्यम से दान की गई वस्तु पितरों तक पहुंचती है। पितृ पक्ष में ब्राह्मणों को भोजन के साथ तिल, फल, वस्त्र, आभूषण, जलदान, भवनदान, वृक्षदान अपनी श्रद्धानुसार करना चाहिए। पितृ पक्ष में इस दान का विशेष महत्व है।


काशीकुंड तीर्थ पर यह होते हैं कार्य
कर्मकांड कराने वाले राजेंद्र शर्मा ने बताया जिस व्यक्ति, परिवार में किसी की मृत्यु हो जाती है और वह उस समय धनाभाव या समयाभाव के कारण उनका कार्य नहीं कर पाते, वह पितृ पक्ष में यहां आकर उनका कार्य करते हैं। यहां प्राणि की मुक्ति के लिए गात्र, खोडसी श्राद्ध, नारायण बलि, सहपिंडी, दसवां आदि कार्य करवाए जाते हैं।
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