सीतापुर। शासन ने परियोजना निदेशक (पीडी) जिला ग्राम्य विकास अभिकरण गजेंद्र प्रताप सिंह को 28 जुलाई को आयुक्त ग्राम्य विकास दफ्तर से संबद्धीकरण का आदेश जारी किया था। पांच दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है। वहीं, पीडी ने 31 जुलाई को पहला ब्लॉक से मनरेगा सामग्री अंश का चार करोड़ से अधिक का भुगतान किया है। यह जिले में चर्चा का विषय बना है।
ग्राम्य विकास अनुभाग-1 के संयुक्त सचिव प्रहलाद बरनवाल ने 28 जुलाई को पीडी गजेंद्र प्रताप सिंह को आयुक्त ग्राम्य विकास कार्यालय में संबद्ध करने संबंधी आदेश जारी किया था। इसमें कहा था कि संबंधित अधिकारी तत्काल आयुक्त ग्राम्य विकास कार्यालय में योगदान देकर योगदान आख्या शासन और आयुक्त ग्राम्य विकास को उपलब्ध कराएं। इसके बाद भी पीडी को कार्यमुक्त नहीं किया गया है। उन्होंने आयुक्त कार्यालय में योगदान नहीं किया है।
वह परियोजना निदेशक के साथ ही पहला ब्लॉक के प्रभारी खंड विकास अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। शासन का संबद्धीकरण आदेश जारी होने के बाद भी उन्होंने 31 जुलाई को पहला ब्लॉक के मनरेगा सामग्री अंश के चार करोड़ से अधिक धनराशि का भुगतान किया है।
सूत्रों का कहना है कि सामग्री अंश के भुगतान में अन्य ब्लॉकों की अपेक्षा पहला में दो फीसदी अधिक अर्थात् सात प्रतिशत कमीशन लिया गया है। इसकी जिले में चर्चा हो रही है। गुरुवार यानि 3 अगस्त को भी मनरेगा सामग्री अंश की बड़ी धनराशि जिले में आनी है। तबादले के बावजूद भी गजेंद्र प्रताप सिंह इस धनराशि से भुगतान की तैयारी में जुटे हैं।
गंभीर मामला, शासन में करेंगे शिकायत
बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव और भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय अवस्थी एडवोकेट ने बताया कि शासन से संबद्धीकरण का आदेश जारी होने के बाद कार्यमुक्त न होना और मनरेगा से बड़ी रकम का भुगतान करना भ्रष्टाचार का मामला है। इसकी शिकायत शासन में करेंगे। सामग्री अंश का चार करोड़ से अधिक भुगतान करने के मामले में संबंधित फर्मों की ओर से दी गई सामग्री के सापेक्ष कार्य किए गए कि नहीं। मौके यह सामान प्रयोग किया गया है कि नहीं। इसकी टीएसी जांच के लिए अनुरोध किया जाएगा।