सीतापुर। जिले में दो दिनों से रुक-रुककर होने वाली बारिश से जन जीवन प्रभावित हो गया। लहरपुर क्षेत्र में दो कच्ची कोठरी ढह गई। शहर में जलभराव व कीचड़ से लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ीं। कई ग्रामीण इलाकों में विद्युत आपूर्ति बाधित है। कभी तेज तो कभी रिमझिम बरसात से फसलों को नुकसान पहुंचा है। 24 घंटे में 11 एमएम बारिश हुई है। अगले दो दिनों तक भी आसमान में बादल छाए रहने के साथ बारिश के आसार हैं।
बुधवार को शुरू हुई बारिश कभी तेज तो कभी धीमी गति से दिनभर होती रही। गुरुवार दोपहर तक बारिश का दौर रुक-रुककर चलता रहा। शहर में लगातार रिमझिम बरसात से जन जीवन प्रभावित रहा। पुरानी तहसील परिसर, रोडवेज बस स्टॉप के सामने और मालगोदाम के पास सड़क पर जलभराव होने से लोगों को आवागमन में दिक्कतें हुईं। जगह-जगह कीचड़ होने से भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। लहरपुर संवाद के अनुसार गुरुवार को झमाझम बारिश ने जन जीवन अस्त व्यस्त कर दिया। भारी बारिश के चलते बाजारों में सन्नाटा छा गया और दुकानदारों ने शाम को दिन ढलने से पहले ही प्रतिष्ठान बंद कर दिए।
तहसील क्षेत्र के इटारी में बारिश के चलते सलीम की दो कच्ची कोठरी ढह गई। हादसे के समय कोठरी में कोई नहीं था। गृहस्थी का काफी सामान नष्ट हो गया। बारिश से सबसे अधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। मोहद्दीनपुर निवासी किसान मुनीजर लाल ने बताया कि धान की फसल कटने के लिए तैयार है, ऐसे में बारिश के चलते धान खेतों में गिर गया है। इसी तरह गन्ने की फसल भी गिरने से नुकसान की आशंका बढ़ गई है। गुलरी पुरवा के किसान राजेंद्र विक्रम ने बताया कि उनका पांच बीघा धान कटने के लिए तैयार था।
अब फसल खेत में गिरकर नष्ट हो गई है। सबसे अधिक नुकसान सब्जी उत्पादकों को उठाना पड़ रहा है। महमूदाबाद के कोरडी निवासी श्यामू ने बताया कि दस बीघा खेत में धान लगाया था। कटने ही वाला था लेकिन दो दिनों से हो रही बारिश ने सारी फसल चौपट कर दी। लगभग 50 प्रतिशत धान बेकार हो गया है। महानगर निवासी प्रमोद ने बताया कि 15 बीघा में धान की फसल लगाई थी। फसल लगभग पक गई थी, बस कटाई होने वाली थी। बारिश ने फसल बर्बाद कर दी। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक अगले 48 घंटों तक बदल छाए रहने के साथ बारिश की संभावना है।
भूसे का संकट भी गहराने की आशंका
रामपुर मथुरा (सीतापुर)। बारिश के चलते धान की फसल अब बर्बादी की कगार पर पहुंचने से नुकसान के साथ चारे का संकट भी गहराने की आशंका है। भूसा वर्तमान में करीब 1100 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। बारिश के चलते धान की फसल सड़ गई तो भूसे के दाम और बढे़ंगे। ऐसे में पशुपालकों के सामने पशुओं को जीवित रखने का संकट खड़ा हो जाएगा।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राकेश मलिक बताते हैं कि गत वर्ष की बाढ़ में धान का पुआल सड़ने से भूसे की मांग अचानक बढ़ गई थी अन्यथा भूसे का रेट 500 से 650 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास ही रहता था।
खेतों में न भरने दें पानी
मानपुर (सीतापुर)। कृषि विज्ञान केन्द्र कटिया के कृषि वैज्ञानिक शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि बेमौसम बारिश से खेती किसानी को नुकसान होने की आशंका ज्यादा है। अभी धान की कटाई शुरू ही हुई थी कि मौसम खराब हो गया। इससे पकी हुई फसल को क्षति हो रही है। बारिश खत्म होने पर धान की लगभग पक चुकी फसल में रोग लग सकते हैं।
ऐसी स्थिति में किसान कार्बेंडाजिम एवं प्रॉपिकॉनाजोल दोनों 400 ग्राम, 200 लीटर पानी यानी दो ग्राम लीटर की दर से छिड़काव करें। खेत से जल निकासी की उचित व्यवस्था रखनी होगी। महोली, लहरपुर जैसे प्रखंड में किसान सब्जियों की अगेती नर्सरी डालते हैं, उन्हें जलभराव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में नर्सरी सड़ सकती है।