सीतापुर। पिसावां ब्लॉक की किसान सेवा सहकारी समिति बरगावां के लेखाकार पर मनमाने ढंग से समिति के कमीशन की रकम में हेरफेर करने का आरोप है। समिति को धान व गेहूं खरीद के लिए मिले कमीशन की करीब 73 लाख रुपये से अधिक की रकम में ये धांधली उजागर हुई है।
बीते मार्च में मामला सुर्खियों में आया तो मुख्यमंत्री के उपसचिव ने मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी सीतापुर को लिखा। सीतापुर के सहायक निबंधक ने आनन फानन जांच कर किसी भी प्रकार की अनियमितता न होने की रिपोर्ट भी दे दी। जांच रिपोर्ट पर सवाल उठा तो सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने जांच करवाने, गलत ढंग से आख्या लगाने और मामले को दबाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की बात कही। इसके बाद जांच लखीमपुर के सहायक निबंधक सहकारिता को सौंप दी गई। विभागीय मंत्री के कहने के बावजूद तीन माह से अब तक वह अपनी रिपोर्ट नहीं दे पाए हैं।
बिना अधिकार लेखाकार ने निकाली रकम
समिति के लेखाकार गोविंद प्रताप यादव पर 35 लाख रुपये से अधिक की रकम को व्यक्तिगत रूप से निकालने का आरोप है। जबकि नियमानुसार लेखाकार इतनी बड़ी रकम स्वयं नहीं निकाल सकते हैं। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि यह रकम वेतन देने के लिए निकाली गई। इतनी बड़ी रकम से किसे और कितना वेतन दिया गया या अन्य किस मद में यह रकम खर्च हुई, यह बात जिम्मेदार बता नहीं पा रहे हैं। इसके अलावा पीसीएफ, इफको, किसान सेवा केंद्र व अन्य मदों में पैसा निकाला गया।
इन कामों में होना चाहिए प्रयोग
सरकार किसानों की उपज सहकारी समितियों के माध्यम से खरीदती है। संबंधित समिति को गेहूं खरीद पर 27 रुपये प्रति क्विंटल व धान खरीद पर 18.75 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन मिलता है। नियामानुसार समिति को मिले कमीशन का प्रयोग सहकारी समिति के भवन की मरम्मत, संबंधित क्षेत्र के विकास कार्य, समिति से संबद्ध किसानों को ऋण देने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसी रकम में हेरफेर हुई है।
जांच अधिकारी बोले- अभी तक नहीं मिला अभिलेख
मुझे इस मामले की विधिवत जांच के निर्देश हैं। मैं इसकी जांच कर रहा हूं। मैंने कुछ अभिलेख तलब किए थे। अभी तक मुझे यह मिल नहीं पाए हैं। इधर वसूली का प्रेशर है। एक बार वसूली की कार्यवाही समाप्त हो जाए तो फिर पूरे मामले की सही से जांच करूंगा।
- पी के शुक्ला
सहायक निबंधक सहकारिता/ प्रकरण के जांच अधिकारी , लखीमपुर खीरी
लेखाकार यूं निकालता रहा रकम, किसी को नहीं लगी भनक
2 सितंबर 2020- 1 लाख रुपये
21 सितंबर 2020- 90 हजार रुपये
6 अक्टूबर 2020- 2 लाख रुपये
16 अक्टूबर 2020- 70 हजार रुपये
7 जनवरी 2021- 1.90 लाख रुपये
9 फरवरी 2021- 5.50 लाख रुपये
18 फरवरी 2021- 3.30 लाख रुपये
1 मार्च 2021- 50 हजार रुपये
9 मार्च 2021- 1.90 लाख रुपये
15 सितंबर 2021- 3.10 लाख रुपये
30 सितंबर 2021- 2.80 लाख रुपये
2 नवंबर 2021- 4.50 लाख रुपये
8 दिसंबर 2021- 7 लाख रुपये