सीतापुर। जिले में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। चालू शैक्षिक सत्र में चौथे चरण में महज 123 आवेदन हुए हैं। लाभार्थियों की तादाद इससे करीब छह गुना तक हो सकती है। अगर अफसर गंभीरता दिखाएं तो इससे वंचित बालिकाओं को लाभ मिल सकता है। समीक्षा में प्रगति बहुत ही कम मिलने पर सीडीओ ने बीएसए को तेजी लाने की हिदायत दी है।
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत तृतीय चरण में बालिका के कक्षा एक में प्रवेश पर दो हजार व चतुर्थ चरण में बालिका के कक्षा छह में प्रवेश पर दो हजार रुपये एकमुश्त दिए जाते हैं। इस योजना का अधिक से अधिक लाभ दिलाने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग को दी गई है। अगर वित्तीय वर्ष 2022-23 की बात की जाए तृतीय चरण में 2198 बालिकाओं को इसका लाभ दिया गया था।
चतुर्थ चरण में 676 आवेदन आए थे। अगर वित्तीय वर्ष 2023-24 में 10 मई तक तृतीय चरण में 495 व चतुर्थ चरण में महज 123 आवेदन आए हैं। दोनों चरण में इस साल बहुत ही कम आवेदन आने से प्रतीत होता है। इस योजना के प्रति लापरवाही बरती गई है। डीएम की समीक्षा में यह आंकड़े आने के बाद नाराजगी जताई है।
बीएसए अजीत कुमार को निर्देशित किया है कि वह लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों को चिन्हित करते हुए तेजी लाई जाए। पिछले साल की तुलना में अधिक से अधिक बालिकाओं को इसका लाभ दिया जाए।
देना होगा प्रमाणपत्र
इस येाजना के तहत सभी बीईओ को इस बात का प्रमाणपत्र देना होगा कि उनके इलाके के विद्यालयों में प्रवेश लेने वाली सभी बालिकाओं को इसका लाभ दे दिया गया है। कोई भी बालिका इससे वंचित नहीं है। सीडीओ अक्षत वर्मा ने कहा प्रमाणपत्र के बाद अगर कोई बालिका योजना से छूटी मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।