सीतापुर। नए शैक्षिक सत्र के तीन माह बीत जाने के बाद भी एनसीईआरटी व अधिकृत प्रकाशकों की पुस्तकों की किल्लत बनी हुई है। इसके चलते महज 11 रूपये में कक्षा नौ की मिलने वाली हिन्दी की पुस्तक की जगह अब निजी प्रकाशक की 172 रूपये की किताब खरीदना अभिभावकों की मजबूरी है। यह हाल जिला मुख्यालय से लेकर तहसीलों तक बना हुआ है। सत्र निकलता जा रहा है तो मजबूरी में विद्यार्थी निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदकर कोर्स पूरा कर रहे हैं।
एक अप्रैल से नये शैक्षिक सत्र की शुरुआत हुई थी। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कक्षा नौ से 12वीं तक के लिए तीन प्रकाशकों के नाम तय किए थे। इनमें राजीव प्रकाशन प्रयागराज, जनरल ऑफसेट प्रिटिंग प्रेस नैनी व डायनामिक टेक्स्ट बुक्स प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड झांसी की ही पुस्तकें इंटर कॉलेजों में चलाने के निर्देश दिए थे। यह पुस्तकें प्राइवेट प्रकाशकों से चार से पांच गुना तक सस्ती है। लेकिन जुलाई बीतने को है, अभी तक सभी विषयों की पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं हो सकी है। जिला मुख्यालय पर तो हिन्दी, गणित व भूगोल की कुछ पुस्तकें मिल जाएंगी जबकि तहसील स्तर पर एनसीईआरटी की एक भी पुस्तक मिलना बहुत मुश्किल है।
50 रुपये की जगह खरीद रहे 172 रूपये की किताब
कक्षा नौ में अंग्रेजी की पुस्तक 172 रूपये में बिक रही है जबकि एनसीईआरटी की यह पुस्तक 50 रूपये की है। इसी तरह गणित की निजी प्रकाशक की पुस्तक 260, विज्ञान 275, सामाजिक विषय की 280 रूपये में निजी प्रकाशक की है। यह एनसीईआरटी में 9 रुपये से लेकर 50 रूपये तक की किताब है। जब बाजार में पुस्तकें नहीं है तो विद्यार्थी मजबूरी में प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें ले रहे हैं।
600 का कोर्स 2000 में है तैयार
कक्षा नौ के विद्यार्थी शिवा बताते हैैैं कि पिछले साल मेरे मित्र ने एनसीईआरटी की पूरा कोर्स खरीदा था तो महज छ: सौ रूपये में छह विषयों की पुस्तकें उपलब्ध हो गई थी। इस बार प्राइवेट प्रकाशकों की यह पुस्तकें खरीदने के लिए करीब 2000 रूपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
सरकारी में राहत तो प्राइवेट में आफत
डीआईओएस ने सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी की ही पुस्तकें चलाने के निर्देश दिए हैं। इस पर सरकारी कॉलेज तो इसका पालन कर रहे है लेकिन निजी कॉलेज इससे बेफ्रिक होकर प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें धड़ल्ले से चला रहे है। इसके बदले उन्हें कमीशन मिल रहा है लेकिन जेब अभिभावक की कट रही है।
बाजार में नहीं मिली पुस्तक
सरकार ने एनसीईआरटी की पुस्तकें चला दी है। यह पुस्तकें काफी सस्ती है। जब बाजार में किताबें नहीं है तो विद्यालय दबाव बना रहे हैं। मजबूरी में महंगी किताबें खरीदकर अपने बच्चे को दी है।
नरेंद्र, अभिभावक
एडवांस में जमा किए पैसे
बेटा इस बार हाईस्कूल में पढ़ रहा है। वह कई बार गणित की पुस्तक खरीदने गया। एडवांस में पैसा भी जमा कर दिया। तीन माह बीत गए तो उसने निजी प्रकाशक की किताब लेकर पढ़ाई शुरु कर दी है।
सौरभ मिश्रा, अभिभावक
प्रकाशकों से हुई है बातचीत
शहर में जनता बुक डिपो को देखा था तो पुस्तकें थी। इस बार टेंडर में देरी होने की वजह से विलंब हुआ है। इधर कांवड़ यात्रा चल रही है तो आवागमन में भी देरी के कारण विलंब हो रहा है। प्रकाशकों से भी बातचीत की है। उन्होंने जल्द से जल्द पुस्तकें मुहैय्या कराने की बात कही है।
राजेंद्र सिंह
जिला विद्यालय निरीक्षक, सीतापुर