कमलापुर/सीतापुर। पिघला दे जंजीरें, बना उनकी शमशीरें... कर हर मैदान फतेह ओ बंदेया... कर हर मैदान फतेह। डीजे पर गूंज रही इस गीत की स्वरलहरियों के संग अनामिका एंड ग्रुप के एनसीसी कैडेट्स ने ताल मिलाई तो समूचा वातावरण देशभक्ति के जज्बे से ओत-प्रोत हो गया। अवसर था परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन मनोज पांडेय की जयंती समारोह का। रविवार को शहीद का पैतृक गांव रूढ़ा इस अनूठे आयोजन का साक्षी बना।
कारगिल की जंग में दुश्मनों से मोर्चा लेते हुए इस गांव की माटी में 25 जून 1975 को जन्मे वीर सपूत ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। कैप्टन मनोज पांडेय की जन्मस्थली पर सेना की ओर से निर्मित शहीद स्मारक पर रविवार को जयंती समारोह मनाया गया। इस दौरान एनसीसी की 22वीं बटालियन के कैडेट्स ने कर्नल गौरव सिंघल के नेतृत्व में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर शहीद को नमन किया। मुख्य अतिथि पंचायती राज समिति के सभापति विपिन कुमार वर्मा, गोरखा रेजीमेंट के कर्नल अभिलाष और कैप्टन मनोज पांडेय के पिता गोपीचंद पांडेय ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प चक्र अर्पित कर नमन किया। सेना के जवानों ने शहीद को सलामी दी। शहीद कैप्टन के पिता गोपीचंद पांडेय को गोरखा रेजीमेंट के कर्नल अभिलाष ने अंगवस्त्र और शहीद की फोटो देकर सम्मानित किया। संचालन एनसीसी कैडेट तनु बाजपेई ने किया। इस मौके पर कमांडिंग ऑफिसर कर्नल गौरव सिंघल, लेफ्टिनेंट कर्नल अनिल सिंह, सूबेदार मेजर मनोज कुमार, सूबेदार मुकेश कुमार, विष्णुदेव यादव, नायक सूबेदार प्रदीप कुमार सिंह, विधायक निर्मल वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष अचिन मेहरोत्रा, डीपीआरओ मनोज कुमार व अन्य मौजूद रहे।
काव्य पाठ संग देशभक्ति के गीतों ने किया भाव विभोर
अंजली सिंह की स्पीच, तनु बाजपेई के काव्य पाठ और रितिक अवस्थी के कर चले हम फिदा जानो तन साथियों और हर करम अपना करेंगे ऐ वतन तेरे लिए... गीत पेश कर यहां मौजूद हर किसी को भावुक कर दिया। अंजली एंड ग्रुप ने संदेशे आते हैं, बड़ा तड़पाते हैं और पूजा व दीपिका के देश रंगीला-रंगीला.. गीत पर प्रस्तुत नृत्य ने दर्शकों के भीतर देश प्रेम की अलख जगा दी। वहीं, शिखा सिंह ने जलवा तेरा जलवा-जलवा गीत पर एकल नृत्य पेश किया तो जय माता दी के उद् घोष से माहौल गूंज उठा।
गोरखा रेजीमेंट ने पुस्तकालय में दी 140 पुस्तकें
मुख्य अतिथि पंचायती राज समिति के सभापति विपिन कुमार वर्मा ने शहीद की स्मृति में बन रही अमृत वाटिका में पौधरोपण किया। फिर शहीद कैप्टन मनोज पांडेय स्मारक पुस्तकालय का अवलोकन किया। यहां गोरखा रेजीमेंट और सैनिक स्कूल की ओर से 140 किताबें पुस्तकालय को प्रदान की गईं।
प्रधान ने पंचायती राज समिति के सभापति को सौंपा मांगपत्र
प्रधान रीना मिश्रा ने मुख्य अतिथि पंचायती राज समिति के सभापति विपिन कुमार वर्मा को चार सूत्री मांग पत्र सौंपा। जिसमें उन्होंने गांव में बरातघर, अंत्येष्टि स्थल, छरासी तक सड़क बनवाने की मांग की है। मुख्य अतिथि ने जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी वर्तिका त्रिपाठी तथा डीपीआरओ मनोज कुमार को ये सभी काम जल्द पूरे कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार हर गांव में जल्द ही एक बरात घर बनवाने जा रही है। हमारी सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर गांवों के विकास का खाका खींचा है।
दिवंगत हवलदार की पत्नी ने बेटे के लिए मांगा रोजगार
गोरखा रेजीमेंट की ओर से शहीद कैप्टन मनोज पांडेय के जन्मोत्सव पर कैंप लगाया। इसमें सेना से रिटायर हो चुके जवानों के परिजनों की परेशानियों को जाना गया। जिले के बदनपुर गांव की रामकली ने बताया कि उनके पति भगवानदीन सेना में हवलदार थे। 2015 में भगवानदीन के गुजर जाने के कारण घर की स्थिति दयनीय हो गई है। तीन लड़कियों और एक लड़के का पालन-पोषण पेंशन के सहारे करना मुश्किल है। उन्होंने बताया किसी तरह दो लड़कियों की शादी कर दी है। एक पढ़ रही है। रामकली ने कहा कि उसकी छोटी बेटी की शादी और पढ़ाई के लिए लड़के को कहीं रोजगार मिल जाए तो घर की स्थिति संभल जाए। सेना के अफसरों ने रामकली की समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया है।
शहीद के गांव में अधूरे विकास की दिखी टीस
रूढ़ा के बाशिंदे जहां इस गांव की माटी में शहीद कैप्टन मनोज पांडेय जैसे वीर सपूत के जन्म लेने से गौरवान्वित हैं, वहीं गांव के अधूरे विकास की टीस भी उनमें साफ दिखाई देती है। ग्रामीण कहते हैं कि अधिकारी और नेता तो आते रहते हैं पर गांव के समुचित विकास को लेकर कोई भी ठोस कदम आज तक नहीं उठाया गया है। लक्ष्मीकांत शुक्ला ने बताया कि शहीद के नाम से बना मनरेगा पार्क अभी भी अधूरा पड़ा है। गांव की नालियों पर पत्थर नहीं पड़े हैं।
सैनिक स्कूल खोले जाने की उठाई मांग
शहीद कैप्टन मनोज पांडेय के भाई मनमोहन पांडेय और उनके पिता गोपीचंद कहते हैं, कि सीतापुर में उनके बेटे के नाम से सैनिक स्कूल की एक शाखा खोली जाए, जिससे आने वाली पीढि़यों को शिक्षा और देशभक्ति की प्रेरणा मिलती रहे।