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अब खुले आसमान में नहीं लगेंगी ग्रामीण बाजार

लखनऊ ब्यूरो Updated Fri, 20 Sep 2019 11:33 PM IST
सीतापुर। ग्रामीण अंचलों में लगने वाली बाजारों के शीघ्र ही दिन बहुरेंगे। इन्हें संवारने को कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने कवायद शुरू कर दी है। मानक स्थल चयन की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद संबंधित ग्रामीण बाजारों में हाटपैठ का निर्माण कराया जाएगा। ग्रामीण बाजारों में चबूतरों को निर्माण होगा। साथ ही उन पर टीनशेड भी बिछेगा। इनके अलावा पेयजल व प्रकाश व्यवस्थाएं भी दुरुस्त की जाएंगी।
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ग्रामीण अंचलों में दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति एवं किसानों द्वारा उत्पादित कृषि उत्पादों की स्थानीय बिक्री के लिए हाट एवं बाजार लगते हैं। अधिकांश बाजारें खुले आसमान के नीचे संचालित हो रही हैं। इससे कृषि उत्पाद असुरक्षित रहते हैं। हाट आने वाले क्रेता व विक्रेता भी जाड़ा, गर्मी, बारिश की समस्या से जूझते हैं।
प्रकाश एवं पेयजल की अनुकूल व्यवस्था न होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने अगुवाई की है। हाटों एवं बाजारों के विकास हेतु लिए गए निर्णय के तहत छह गुणा बीस मीटर साइज के दो छायादार चबूतरे एवं अन्य आवश्यक जन सुविधाएं निर्मित कराए जाने एवं प्रकाश, पेयजल आदि की व्यवस्था आवश्यकतानुसार कराए जाने की योजना है।
योजना के तहत बाजारों को विकसित करने का मानक निर्धारित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र की ऐसी बाजारें जो सार्वजनिक स्थान और निर्विवाद भूमि पर लगती हो। जिन पर निर्माण कराया जाना विधिक रूप से संभव हो।
न्यूनतम एक हजार वर्ग मीटर ऐसा स्थान उपलब्ध होना चाहिए जहां पर छह गुणा बीस मीटर के दो छायादार चबूतरे एवं अन्य सुविधाएं विकसित किया जान संभव हो सके। बाजार से संबंधित भूमि सार्वजनिक अर्थात ग्राम पंचायत, जिला पंचायत के स्वामित्व की होनी चाहिए। संबंधित बाजार राजस्व दस्तावेजों में खेल का मैदान, खलिहान, संग्रह तालाब, चारागाह और कब्रिस्तान आदि के रूप में आरक्षित न हों।
उप निदेशक (निर्माण) कृषि आरपी दुबे ने बताया कि प्रचलित ग्रामीण बाजारों में हाटपैठ का निर्माण कराने के लिए सभी मंडी सचिव को निर्देश दिए गए थे, मात्र चार बाजारों के प्रस्ताव प्राप्त हो सके हैं। सभी विधायकों से भी प्रस्ताव मांगे गए हैं। जिससे उनके विधानसभा क्षेत्र में हाटपैठ विकसित कराया जा सके।
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