अशोक रावत, मंजरी राही और नीलू सत्यार्थी
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संसदीय सीट मिश्रिख (सुरक्षित) की सियासी जंग में मुद्दे विकास, राष्ट्रवाद और जातीय समीकरणों में उलझकर रह गए हैं। भाजपा और गठबंधन की सीधी टक्कर को कांग्रेस त्रिकोणात्मक बनाने की कवायद में जुटी हुई है। भाजपा ने दो बार बसपा से सांसद रहे अशोक रावत पर दांव लगाया है। उनकी दलित वोट बैंक में गहरी पैठ है। वे राष्ट्रवाद की बात कर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जातीय वोटों को भी साधने में जुटे हैं।
सपा-बसपा गठबंधन में बसपा ने नीलू सत्यार्थी को उतारा है। नीलू इस क्षेत्र के लिए नया चेहरा हैं। वे सपा-बसपा के परंपरागत वोट बैंक के साथ समान्य वर्ग में सेंधमारी में जुटी हैं। वहीं, कांग्रेस ने मंजरी राही को उतारा है। वे पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री रामलाल राही की बहू हैं। रामलाल यहां से 4 बार सांसद रहे हैं। वे 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपाई हो गए थे। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले घर वापसी कर ली और बहू को प्रत्याशी भी बनवा दिया। मंजरी रामलाल राही की बेहतर छवि, कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक और जातीय समीकरणों के सहारे दिल्ली पहुंचने की फिराक में हैं।
बाढ़ से लेकर ट्रॉमा सेंटर... सारे मुद्दे गायब
इस संसदीय क्षेत्र के तीन क्षेत्रों लहरपुर, विसवां और महमूदाबाद हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलता है। बाढ़ से कई बीघा फसलें बर्बाद हो जाती हैं। सैकड़ाें घर डूब जाते हैं। इससे प्रभावित लोगों को हर साल इससे निपटने के वादे किए जाते हैं, पर स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकाला जा सकता है। वहीं, पुराना सीतापुर में लंबे समय से बालिका डिग्री कॉलेज की मांग है, लेकिन किसी भी दल ने इस पर ध्यान नहीं दिया। करीब पांच साल पहले बनकर तैयार ट्रॉमा सेंटर आज भी खुलने की बाट जोह रहा है।
विकास को तरसता नैमिष
नैमिषारण्य तीर्थ स्थल होने के बावजूद विकास में काफी पिछड़ा है। हालांकि इसे पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने और विशेष पैकेज दिलाए जाने की घोषणाएं हमेशा होती रहीं। पर कभी अंजाम न चढ़ सकीं। ट्रेनों के अभाव में ब्राडगेज लाइन पर्यटकों को मुंह चिढ़ाती है। दशकों पहले यहां से शुरू दिल्ली ट्रेन कब की बंद हो चुकी है। यही हाल इससे जुड़े मिश्रिख इलाके का भी है। पंद्रह दिन तक चलने वाले यहां के होली परिक्रमा में पूरे देश के साधु-संत एकत्र होते हैं। इनकी तादाद के हिसाब से इसे कुंभ के बाद का संतों का सबसे बड़ा समागम माना जाता है। बावजूद इसके यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यही हाल इलाके के हत्याहरण तीर्थ और गंगा किनारे राज घाट का भी है।