मास्टरबाग/सीतापुर। आंधी में कमुआपुरवा की ऐसी बिजली उड़ी कि 18 साल बाद भी आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई। गांव में उजाला होने की राह ताकते-ताकते कई ग्रामीण बुढ़ापे की दहलीज तक पहुंच गए। अफसरों से गुहार लगाकर यहां के लोग थक गए पर गांव का विद्युतीकरण नहीं कराया जा सका। हालात यह है कि बच्चों को सौर ऊर्जा की एलईडी लाइट अथवा ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ती है। मोबाइल तक चार्ज करने के लिए लोग पड़ोस के गांव जाने को मजबूर हैं।
कंदुनी पावर हाउस के दायरे में आने वाले कमुआपुरवा गांव की लगभग 1600 की आबादी है। आजादी के 75 साल बाद भी गांव मूलभूत सुविधा से वंचित है। ऐसा नहीं है, कि गांव में विद्युतीकरण नहीं कराया गया। करीब 18 साल पहले विद्युतीकरण के बाद यहां के मकान व गलियां भी बिजली की रोशनी से जगमग हुए थे। एक माह तक सब ठीक रहा। इसके बाद आंधी आने से विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। फिर आज तक यहां विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई है।
गांव के अशोक गुप्ता बताते हैं, कि इस दरम्यान कई पोल टूटकर गिर चुके हैं। बिजली के तार चोर उठा ले गए। दोबारा यहां बिजली की सुविधा मयस्सर नहीं हो पाई। बच्चों को पढ़ाई-लिखाई तो किसानों को सिंचाई के लिए दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। ग्रामीणों ने कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई, पर नतीजा सिफर रहा। पिछले दिनों किसान दिवस में डीएम अनुज सिंह के सामने भी यह समस्या उठाई गई है। डीएम ने पॉवर कॉर्पोरेशन के अफसरों को गांव में विद्युतीकरण कराने के निर्देश दिए हैं।
विद्युत उपकरण बने शोपीस
गांव के कमलेश व बिंद्रा प्रसाद बताते हैं, कि ऐसा कोई परिवार नहीं होगा जहां पंखा, कूलर, टीवी, प्रेस, मिक्सी आदि न हों। दरअसल, शादी में उपहार के तौर पर कई तरह के विद्युत उपकरण मिलते हैं। बिजली के अभाव में ये महज शोपीस बनकर रह गए हैं। रामपाल, निरंजन, गोकर्ण व गोवर्धन ने बताया कि मोबाइल तक चार्ज करने के लिए पड़ोस के गांवों में जाना पड़ता है।
सौ मीटर का फासला तय नहीं कर पा रहा विभाग
गांव के धनीराम और रमेश बताते हैं, कि महज सौ मीटर दूर सामुदायिक शौचालय में विद्युत कनेक्शन है। वहां बिजली है। मगर विभागीय अफसर सौ मीटर दूर गांव तक बिजली नहीं पहुंचा पा रहे हैं। कई बार लिखित व मौखिक रूप से शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है।
कमुआपुरवा में विद्युतीकरण कराए जाने को लेकर इस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। अभी स्वीकृति नहीं मिली है, स्वीकृति मिलते ही विद्युतीकरण कराते हुए आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
- जगदीश प्रसाद, अवर अभियंता, पावर कॉर्पाेंरेशन