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सैकड़ों साल पुराने जिंद बाबा स्थान के अस्तित्व पर संकट

लखनऊ ब्यूरो Updated Sun, 25 Aug 2019 11:30 PM IST
रेउसा (सीतापुर)। घाघरा व शारदा नदियों के तेज बहाव से रविवार को 50 बीघा खेत नदी में समा गए। सैकड़ों साल पुराने जिंद बाबा का स्थान कटान की जद में आ गया है। इलाके में आस्था का प्रमुख केंद्र जिंद बाबा के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। उधर, बैराजों से रविवार को फिर 94 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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इससे तटीय क्षेत्र के बाशिंदों में दहशत है। जिले के गांजरी इलाके में होकर बहने वाली घाघरा और शारदा नदियों के पानी में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। पिछले दो दिनों से नदियों का जलस्तर काफी कम हुआ है। इसके बाद भी कटान रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
जटपुरवा के करीब नसीर आलम, उमाराम, मुल्लू व रावत और परमेश्वरपुरवा के करीब बुधई, सियाराम आदि की तकरीबन 50 बीघा खेती पानी के तेज बहाव से कटकर नदी में समा गई है। चौकीपुरवा के करीब स्थित सैकड़ों साल पुराने जिंद बाबा का स्थान कटान की भेंट चढ़ने लगा है।
लगभग एक बीघा जमीन काटकर लहरें जिंद बाबा स्थान की तरफ बढ़ रही हैं। इसी रफ्तार से कटान जारी रहा तो सैकड़ों साल से ग्रामीणों की आस्था का केन्द्र रहे जिंद बाबा का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। तटीय क्षेत्र के गांवों के संपर्क मार्गों पर भरा पानी कम जरूर हुआ है, लेकिन कीचड़ के कारण फिलहाल ग्रामीणों को कोई राहत नहीं मिल पा रही है।
बिसवां तहसीलदार राजकुमार गुप्ता ने बताया कि तीनों बैराजों से रविवार को 94 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। नदियों का पानी अपने दायरे में है। बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। फिर भी एहतियात के तौर पर बराबर निगाह रखी जा रही है।
‘कोई काम नहीं होगा, कट जाने दो जटपुरवा’
बाढ़ व कटान की रोकथाम को लेकर योगी सरकार भले संजीदा हो, लेकिन नौकरशाही का संवेदनहीन रवैया पहले की तरह बरकरार है। रविवार को मेवड़ीछोलहा के करीब लहरों की ठोकर से क्षतिग्रस्त स्टड को सिंचाई विभाग दुरुस्त करा रहा था। इसी बीच जटपुरवा के नसीर आलम, मुजर्रहमान आदि ग्रामीण वहां पहुंच गए।
ग्रामीणों ने जेई भोला प्रसाद से कहा कि उनके गांव के पास बनाया गया बांस का बांध कारगर नहीं रहा। कटान अब भी जारी है। इसलिए कोई ठोस उपाय कर दिया जाए ताकि कटान रुक सके। ग्रामीणों का आरोप है कि इतना सुनते ही जेई भड़कते हुए बोले जटपुरवा कट रहा है तो कटने दो, वहां अब कोई काम नहीं होगा।
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