नैमिषारण्य(सीतापुर)। कांची कामकोटि के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती ने शनिवार को नैमिषारण्य तीर्थ पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने कथा भी सुनी।
सबसे पहले रुद्रावर्त तीर्थ के दर्शन किए। इसके बाद वह कालीपीठ पहुंचे। यहां पर कालीपीठाधीश गोपाल शास्त्री ने अंग वस्त्र भेंटकर दक्षिण मुखी माता काली का पूजन कराया। आदि शक्तिपीठ ललिता देवी मंदिर में प्रधान पुजारी गोपाल शास्त्री ने पूजन कराया। चक्रतीर्थ पर प्रधान पुजारी राजनारायण पांडेय ने विधि विधान से चक्रतीर्थ का महत्व बताया। इसके बाद शंकराचार्य ने व्यास गद्दी पहुंचकर दर्शन किए। इसके साथ ही बालाजी मंदिर में चल रहे लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में सम्मिलित होकर भैयाजी के सानिध्य में पूजन किया। वह श्रीसत्यनारायण धाम मंदिर व स्वामी नारदानंद आश्रम में चल रही भागवत कथा में भी पहुंचे। स्वामी विद्या चैतन्य ने उनका स्वागत किया। इस दौरान शंकराचार्य ने कहा कि वर्ष 1997 के बाद दूसरी बार नैमिषारण्य आए हैं।