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Sitapur News: आफत का सैलाब, प्राइवेट नाव वसूल रहीं मनमाना किराया

Mon, 24 Jul 2023 11:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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बाढ़ग्रस्त इलाकों में सरकारी नाव न होने से ग्रामीण परेशान
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सरयू का फिर बढ़ने लगा जलस्तर, 118.60 मीटर पर पहुंचा

बैराजों से छोड़ा गया 3 लाख 20 हजार 978 क्यूसेक पानी

संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर मथुरा/सीतापुर। सरयू का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। सोमवार को 20 सेमी बढ़ोतरी के साथ जलस्तर 118.60 मीटर पर पहुंच गया। इससे तटवर्ती गांवों के बाशिंदे सैलाब को लेकर सहमे हुए हैं। प्रशासन सारी तैयारियां मुकम्मल होने का दावा जरूर कर रहा है। बाढ़ ग्रस्त इलाके में रास्तों पर पानी भर जाने से कई गांवों के ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ग्रामीण महंगा किराया देकर निजी नाव से आवागमन करने को मजबूर हैं। उधर, बैराजों से 3 लाख 20 हजार 978 क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है। यह पानी गांजर में पहुंचने से हालात बिगड़ सकते हैं।

सरयू का जलस्तर पिछले दो दिनों से 118.40 मीटर पर स्थिर था। इससे गांजर वासियों को राहत मिली थी। सोमवार को फिर सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। पानी 20 सेमी बढ़ने से अब जलस्तर 118.60 मीटर पर पहुंच गया है। इससे नदी तथा तटबंध के बीच में बसे दर्जनों गांवों के लोगों को एक बार फिर बाढ़ व कटान की समस्या से जूझने का डर सताने लगा है।
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पिछले सप्ताह सरयू नदी में बाढ़ आने पर शुकुलपुरवा व बलेशर पुरवा समेत पांच गांवों के आवागमन के एकमात्र रास्ते पर पानी भर गया है। इससे इन गांवों का आवागमन बाधित हो गया है। प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था नहीं कराए जाने के चलते लोग निजी नाव से आवागमन कर रहे हैं। इसके लिए ग्रामीणों को बढ़ा किराया देना पड़ रहा है। बाढ़ के समय बंगालीपुरवा घाट पर भी नाव से ही लोगों को नदी पार करनी पड़ती है। बाढ़ के बाद 4 से 5 माह तक यह रास्ता बाधित हो जाता है। दरअसल, एक दशक पहले तक सरयू नदी के पड़ोस में एक गोबरहिया नदी भी बहती थी। सरयू के तेज बहाव से कई जगह गोबरहिया नदी का ज्यादातर हिस्सा कटकर सरयू में मिल गया है। किंतु बंगाली घाट के पास कुछ दूरी में गोबरहिया नदी आज भी मौजूद है।

शुकुल पुरवा प्रधान श्रीराम निषाद ने बताया कि सरयू में बाढ़ आने पर गोबरहिया नदी में भी पानी आ जाता है। यह पानी नवंबर या दिसम्बर तक रहता है जिससे कनरखी, छेदपुरवा, नयापुरवा, धान्धी, बैजुपुरवा, अर्जुनपुरवा, कोठार आदि गांवों की सात हजार आबादी को जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार करनी पड़ती है। इसी गांव के जियालाल ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या कंपोजिट स्कूल शुकुलपुरवा जाने वाले बच्चों के सामने आ जाती है। उन्हें स्कूल जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। नाव न मिलने पर बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं। रामबहादुर ने बताया कि लोगों को नदी पार करवाने के लिए मथुरा गांव की दो प्राइवेट नावें चलती हैं। नाविक ग्रामीणों से मनमाना किराया वसूलते हैं।
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बाक्स

किस बैराज से छोड़ा गया कितना पानी

शारदा बैराज- 1,38,707 क्यूसेक

घाघरा बैराज- 1,25,721 क्यूसेक

बनबसा बैराज- 56,550 क्यूसेक

बाक्स

जांच के बाद होगी उचित कार्रवाई

बाढ़ग्रस्त इलाके में कहीं नाव की जरूरत है और सरकारी नावें उपलब्ध नहीं हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता वाले स्थानों पर नाव उपलब्ध कराए जाएगी। तराई क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है। अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं।

- शिखा शुक्ला, एसडीएम महमूदाबाद
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