सीतापुर। बढ़ती महंगाई ने फिर आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। अब दाल-रोटी का इंतजाम भी मुश्किल होगा। आटे की कीमतों में एक माह में 6 रुपये प्रति किलो की बढ़ोत्तरी हुई है। दाल, मैदा, छोला इत्यादि के दामों में भी उछाल आया है। इससे सामान्य परिवारों के बजट के साथ उनके खाने का जायका भी बिगड़ने लगा है।
अब सामान्य परिवारों के लिए दाल-रोटी भी महंगी हो गई है। आटे की कीमतें दीपावली के बाद से लगातार बढ़ रही हैं। आलम यह है कि एक माह में आटे की कीमतें 6 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई हैं। आटा 30 नवंबर को 30 रुपये से उछलकर 33 रुपये प्रति भाव पहुंच गया था। एक बार फिर आटे ने भाव खाया और दाम बढ़कर अब 36 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं।
अरहर की दाल 100 रुपये से बढ़कर 105 रुपये जबकि उरद की दाल के दाम 85 से बढ़कर 90 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं। मैदा, रवा, छोला, जीरा आदि की दरों में भी इजाफा हुआ है। शहर की लोहामंडी में परचून की दुकान चलाने वाले अनूप कहते हैं कि आटे का भाव एक माह में दूसरी बार बढ़ा है। पिछले एक पखवाड़े से अन्य खाद्य सामग्रियों की कीमतें भी बढ़ रही हैं।
खाद्य सामग्रियों पर महंगाई की मार सबसे अधिक सामान्य व निम्न परिवारों पर पड़ रहा है। गृहणी ममता मेहरोत्रा ने कहा कि रोटी-दाल थाली का मुख्य व्यंजन है। यह सामग्रियां महंगी होने से रसोई का बजट बिगड़ने लगा है।
गृहणी वैशाली गुप्ता ने कहा कि जमाखोरी रोकने के लिए कोई ठोस कदम न उठाए जाने से कीमतें नियंत्रण से बाहर होती जा रही हैं। गृहणी रंजना पांडेय कहती हैं, कि महंगाई ने पहले ही जीना मुहाल कर रखा है। अब आटा-दाल व अन्य सामग्रियों के दाम बढ़ने से नई मुसीबत खड़ी हो गई है। सामान्य व निम्न वर्ग की परेशानी समझते हुए शासन-प्रशासन महंगाई काबू में करने के लिए ठोस कदम उठाए।