रामपुर मथुरा/सीतापुर। सरयू के तटवर्ती इलाके में तीन गांवों के बाशिंदों को अब तक बाढ़ से छुटकारा नहीं मिल सका है। निचले क्षेत्र में बसे इन गांवों के 36 घरों में बाढ़ का पानी अभी तक भरा हुआ है। यहां के 17 परिवारों ने अपने घरों में पानी भरा होने से तटबंध पर शरण ले रखी है। इन्हें कई तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है।
प्रशासन भी अब बाढ़ पीड़ितों की सुधि नहीं ले रहा है। बैराजों से छोड़े जाने वाले लाखों क्यूसेक पानी से विगत सात अगस्त को सरयू का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया था। तटवर्ती करीब 35 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। इसके बाद एक पखवाड़े तक बाढ़ व कटान ने कहर बरपाया था। जलस्तर में कमी आने से अगस्त के आखिरी सप्ताह में हालात सामान्य हो गए। लेकिन निरंजनपुरवा, प्यारेपुरवा और बलेसरपुरवा के 36 घरों में अब तक बाढ़ का पानी भरा हुआ है।
दरअसल, यह निचला क्षेत्र है। पानी निकलने का कोई प्रबंध भी नहीं है। लिहाजा, हालात सामान्य होने के बाद भी इन गांवों के कई परिवार बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे हैं।
प्यारेपुरवा के बाबूराम घर में पानी भरा होने से परिवार समेत तटबंध पर शरण लिए हैं। बाबूराम ने बताया कि बाढ़ तो खत्म हो गई लेकिन एक तरफ तटबंध, दूसरी तरफ ठोकर और तीसरी ओर अखरी जाने वाली सड़क होने के कारण पानी गांव से बाहर नहीं निकल पा रहा है। अब तक घुटने भर पानी घरों में भरा हुआ है। घर होने के बावजूद तटबंध पर झोपड़ी डालकर रहना पड़ रहा है। रामलखन ने बताया कि सारी गृहस्थी तटबंध पर छोटी झोपड़ी में नही रख सकते हैं। दैनिक जरूरतों के लिए कई बार गांव वाले मकान में बाढ़ के पानी से होकर जाना पड़ता है। जिससे पैरों में संक्रमण भी हो गया है।
ननकुन्ना ने बताया कि प्रशासन का रवैया बहुत खराब है। जब तक बाढ़ रही लंच पैकेट एक टाइम बांट देते थे। जैसे ही जलस्तर कम हुआ प्रशासन का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी हम लोगों की सुधि लेने नहीं आया है। राशन व ईंधन की समस्या के चलते कई परिवार आज भी दोनों समय का भोजन नहीं बना पा रहे हैं। सुकई बताते हैं, कि आज तक भरे पानी के कारण गृहस्थी का काफी समान खराब हो चुका है। कई परिवारों को मदद की दरकार है।
कटान की भेंट चढ़ गया एक आशियाना
सरयू का जलस्तर घटने के बाद सोमवार को बलेसरपुरवा के पास कटान शुरू हो गया। लहरों की जद में आकर राम जियावन का घर सरयू में समा गया। यहां के तीन घर कटान की कगार पर हैं। इससे ग्रामीणों में डर बना हुआ है।
कोई विकल्प तलाशा जाएगा
अब बाढ़ के हालात न होने से उस समय मिलने वाली सुविधाएं नहीं दी जा सकती हैं। यदि कुछ घरों में अब तक पानी भरे होने से समस्याएं आ रही हैं तो जांच करवाकर किसी उचित विकल्प पर विचार किया जाएगा।
- सूरज प्रताप सिंह, तहसीलदार महमूदाबाद