रामपुर मथुरा (सीतापुर)। क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का दंश झेल चुके ग्रामीण अब प्रशासनिक लापरवाही का दंश झेलने को मजबूर हैं। सरयू नदी की बाढ़ व कटान में अपना आशियाना गंवाने के बाद पक्के आवास की प्रतीक्षा कर रहे दर्जनों परिवार आज भी खुले आसमान तले बसर करने पर मजबूर हैं।
अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों ने बाढ़ के वक्त इनको पक्के आवास दिलाने के वादे किए थे। लेकिन उन वादों को जिम्मेदार भुलाए बैठे हैं। इस वजह से अंगरौरा निवासी सूर्यमन तिवारी, दीनबंधु, चंद्रमन,कृष्णनारायन,रमेश व अखरी निवासी राकेश,शिवमंगल व रमदेई और शंकरपुरवा निवासी मनिया व देवरिया संग करीब दो दर्जन परिवार मौसम की मार झेल रहे हैं। कुछ तो तिरपाल को जुगाड़ से तानकर काम चला रहे हैं।
जमीन नहीं तो कहां बनाएं आशियाना
आवास से वंचित बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि जिन लोगों को पैसा मिल चुका है, उनके पास घर बनाने के लिए जमीन नहीं है। जमीनें कटान में चली गईं। प्रशासन आज तक घर के लिए जमीनें नहीं दे पाया है। आवासीय भूमि न उपलब्ध करवाए जाने से हम लोग तटबंध पर पल्ली तानकर रह रहे हैं।
एसडीएम बोलीं- ब्लॉक को भेजी सूची, बीडीओ बोले- सभी अपात्र
उपजिलाधिकारी महमूदाबाद शिखा शुक्ला ने बताया कि जिन लोगों के घर बाढ़ कटान में कट जाते हैं। उनकी सूची ब्लॉक को भेजी जाती है। इस वर्ष भी सूची भेज दी गई है। बीडीओ द्वारा जांचकर आवास देने की प्रक्रिया की जाती है। वहीं, बीडीओ संदीप कुमार ने बताया कि तहसील से 34 लोगों की सूची प्राप्त हुई थी। जांच करने पर पाया गया कि सभी को करीब 95 हजार रुपया घर बनाने के लिए दिया जा चुका है। इसलिए इन्हें अपात्र मानते हुए आवास नहीं दिया गया। जमीन की जानकारी नहीं है।