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नदियों का पानी उतरने से कटान तेज, नदी में समाए पचास बीघा खेत

लखनऊ ब्यूरो Updated Fri, 20 Sep 2019 11:18 PM IST
सीतापुर। घाघरा व शारदा नदियों का पानी अब नीचे खिसकने लगा है। इससे कटान तेज हो गई है। पानी से घिरे 20 गांवों से बाढ़ का खतरा तो फिलहाल टल गया लेकिन कटान की तलवार लटकने लगी है। शुक्रवार को करीब 50 बीघा खेते घाघरा में समा गए।
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रास्तों पर पानी घटने के बाद भी कीचड़ के कारण मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। ग्रामीणों को आवागमन में खासी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। बैराजों से शुक्रवार को 1.17 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
जिले के गांजरी इलाके से होकर बहने वाली शारदा व घाघरा नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर पिछले डेढ़ महीने से चल रहा है। नदियां उफनाने पर पानी का तेज बहाव आबादी के करीब पहुंच जाता है। जलस्तर घटने से कटान होने लगती है।
नदियों के किनारे बसी आबादी के लिए राहत की बात यह है कि इस साल अभी तक बाढ़ नहीं आई है। लिहाजा, गांवों के हालात पिछले साल के मुकाबले सामान्य हैं। इसके बावजूद नदियों के पानी का उतार-चढ़ाव तटीय क्षेत्र के बाशिंदों को चैन नहीं लेने दे रहा है।
पानी से घिरे फौजदारपुरवा, कोनी, परमेश्वरपुरवा, मरेली, चौकीपुरवा, ठेकेदारपुरवा, सलामतपुरवा, जैतहिया, बिल्लरपुरवा, दुर्गापुरवा, जिन्नापुरवा, लालापुरवा, खुशीराम पुरवा तथा जटपुरवा के बाशिंदों को जलस्तर में गिरावट के बाद भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक पानी घटने पर कटान शुरू हो जाती है। इसलिए इन गांवों पर अब कटान का खतरा मंडराने लगा है। शुक्रवार को अलग-अलग गांवों के किसानों का लगभग पचास बीघा खेत फसल सहित नदी में समा गए।
रास्तों का पानी घटने के बाद कीचड़ के कारण ग्रामीणों को आवागमन में अब भी परेशानी उठानी पड़ रही है। उधर, बैराजों से शुक्रवार को 1 लाख 17 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। ग्रामीणों का मानना है कि लगातार पानी छोड़े जाने की वजह से मुसीबतें टलती नजर नहीं आ रही हैं।
मेवड़ी छोलहा गांव के ओमकार, गंगाराम, रामनोहर तथा धनीराम आदि शुक्रवार की सुबह जानवरों के लिए चारा लेने निकले थे। गांव के बाहर पूरब की ओर निकलते ही ग्रामीणों को सूखे स्थान पर एक घड़ियाल नजर आया। घड़ियाल दिखते ही हड़कंप मच गया। ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुटने लगी। हलचल बढ़ती देख घड़ियाल पानी में उतर गया। घड़ियाल दिखने से मेवड़ी छोलहा के ग्रामीण भयभीत हैं।
बिसवां के एसडीएम शिशिर कुमार ने बताया कि पहले से काफी कम पानी बैराजों से छोड़ा गया है। शुक्रवार को 1 लाख 17 हजार क्यूसेक पानी ही डिस्चार्ज हुआ है। इसका असर नदियों के घटते जलस्तर के रूप में देखने को मिल रहा है। बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। फिर भी एहतियात के तौर पर इलाके में लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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