रामकोट(सीतापुर)। पिसावां की ग्राम पंचायत हरनी में एक सप्ताह के अंदर चार लोगों की मौत हो गई। भौवापुर गांव में एक छात्र ने दम तोड़ दिया। पांच गांवों में 120 से अधिक लोग बीमार हैं। इन गांवों में सीएचसी की टीमें नहीं पहुंच रही हैं। इससे मरीज झोलाछाप से इलाज करवाने को मजबूर हैं।
हरनी गांव के कुंभकर्ण की दो दिन पहले व अर्जुन सिंह की 10 अगस्त को बुखार की वजह से मौत हो गई थी। हरनी ग्राम पंचायत के कीरतपुर गांव में पप्पू की मौत हुई। अनंतू की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत है।
ये सभी लोग कई दिनों से बुखार से पीड़ित थे। पहले निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे थे। इसी तरह रामकोट इलाके के सिकटिहा भौवापुर निवासी कक्षा पांच के छात्र संदीप मौर्या को कई दिनों से बुखार आ रहा था। पहले परिजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। उसके बाद बलरामपुर हॉस्पिटल, लखनऊ में इलाज के दौरान शुक्रवार को मौत हो गई। वहीं हरनी गांव के प्रधान प्रतिनिधि फारुख अली सहित 20 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं।
फारूख अली ने बताया कि ग्राम पंचायत में बुखार फैला हुआ है, लेकिन कोई भी स्वास्थ्य कर्मी नहीं पहुंचा है। इसी तरह पिसावां इलाके के अर्थाना, ननसोहिया, हरनी व कल्लूपुरवा गांव में 100 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं। ये लोग झोलाछाप से इलाज करवाने को मजबूर हो रहे हैं।
अर्थाना गांव के अमन पांडेय, विष्णु, आदित्य, निर्भय, जीतेंद्र व अभिषेक आदि ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बीहट गौर में तैनात डॉक्टर आए दिन गायब रहतीं हैं। ग्रामीणों को समुचित इलाज नहीं मिल पाता है। जब भी उनके बारे में पूछा जाता है तो पता चलता है आज वह ट्रेनिंग पर हैं या कहीं अन्य जगह ड्यूटी लगी है। केवल फाार्मासिस्ट ही मौके पर मिलते हैं।
भेजी जाएगी टीम
गांवों में बुखार फैलने की सूचना पर समय-समय पर टीमें भेजी जाती हैं। ग्रामीणों की मौत की जानकारी नहीं है। जिन गांवों में समस्या है वहां पर टीम भेजी जाएगी।
डॉ. अवनीश वर्मा, सीएचसी अधीक्षक, पिसावां