सीतापुर। जिला अस्पताल की डीएसएल टू लैब की खामियां दूर नहीं हो पा रही हैं। जिम्मेदार सही कारण दूर करने के बजाय छुपाने में जुटे हुए हैं। तीन मरीजों की वायरल लोड की जांच 15 दिन बाद देनी की बात कही, जबकि 15 दिन में तो केजीएमयू लखनऊ से जांच रिपोर्ट आ जाती है। अब सवाल उठता है अगर जिले में इतनी देरी हो रही है तो इस लैब का क्या मतलब है। समय से जांच रिपोर्ट न मिलने के चलते इलाज में देरी होती है। बेहटा के सोनसरी गांव में हेपेटाइटिस के 141 मरीज मिलने के बाद इन मरीजों में रोग की पुष्टि के लिए वायरल लोड की जांच की गई थी। यह जांच डीएसएल टू लैब में होती है। इन मरीजों का सैंपल लेकर केजीएमयू लखनऊ जांच रिपोर्ट के लिए भेजा गया था। वहां से रिपोर्ट आने में 15 दिन बीत गए। इसके बाद अफसरों ने जिला अस्पताल की खामियां दूर करवाते हुए लैब का संचालन शुरू करवा दिया। सोमवार को हेपेटाइटिस के तीन मरीजों का सैंपल लिया गया। इन मरीजों को 15 दिन बाद जांच रिपोर्ट लेने के लिए बुलाया गया है। मरीज भी लंबी अवधि के चलते परेशान हो रहे हैं। मरीजों ने कहा फिर जिला अस्पताल में जांच कराने का क्या मतलब है। मामले में सीएमओ डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को वायरल लोड की जांच दो दिन के अंदर मिल जानी चाहिए। सीएमएस से बात करके मरीजों को दो दिन के अंदर रिपोर्ट दिलाई जाएगी। (संवाद)