सीतापुर/। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने सम्मान दिलाया। राम मेरे जीवन, मेरी सांसों में बसे हैं। यह कहना है, राम कथा पर एमफिल व पीएचडी करने वाले डॉ. अब्दुल अजीज अर्चन का। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से प्रफुल्लित डॉ. अब्दुल अजीज कहते हैं, कि मेरे लिए इससे बड़ी खुशी भला और क्या हो सकती है। उत्साह से लबरेज अब्दुल अजीज 22 जनवरी को अपने घर में दीपोत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं।
खैराबाद में गुलमर्ग मंजिल काला प्यादा निवासी डॉ. अब्दुल अजीज ने प्रभु श्रीराम को इमामे हिंद मानते हैं। उनका मानना है, कि श्रीराम विश्व के सबसे बड़े कैरेक्टर हैं। राम तो कण-कण में हैं, राम हमारे दिल में हैं। वह सबके राम हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1980 में बनारस यूनिवर्सिटी से राम कथा पर एमफिल करने के दौरान फारसी लिपि में उपलब्ध मानस की पांडुलिपियों का अध्ययन और संपादन किया।
वर्ष 1982 में पीएचडी के साथ फारसी लिपि में उपलब्ध साहब राय कायस्थ कृत रामायण का अध्ययन और संपादन किया। गोस्वामी तुलसीदास की हस्तलिखित लंदन की लिटेल लाईब्रेरी से एक प्रति मंगवाई थी। जिसको आने में एक माह का समय लगा था। उसका फारसी से हिंदी अनुवाद किया। इसमें डेढ़ साल लग गए। हिंदी व उर्दू में इन्होंने 11 पुस्तकें लिखी हैं। इनमें अर्चन व सतसई ग्रंथ प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि राम कथा का मेरी जिंदगी में खास महत्व है। राम कथा पर एमफिल और पीएचडी करने के लिए वर्ष 1998 में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल मो. शफी कुरैशी और 2013 में उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने सम्मानित किया था।
घर में जलाएंगे दीप, श्रीराम से विश्व कल्याण की करेंगे प्रार्थना
डॉ. अब्दुल अजीज कहते हैं, कि निमंत्रण मिलता तो इस ऐतिहासिक मौके पर अयोध्या जरूर जाते। फिर भी श्रीराम के लिए अपने घर में दीप जलाकर उत्सव मनाएंगे। विश्व कल्याण के लिए श्रीराम से प्रार्थना करेंगे।
राम के चरित्र को अपनाएं देशवासी
डॉ. अब्दुल अजीज ने कहा कि राज्य क्या था, कैसा था। इसको समझने की जरूरत है। उन्होंने सभी देश वासियों से राम के चरित्र को अपनाने की अपील की है। डॉ. अब्दुल अजीज कहते हैं, कि श्रीराम के चरित्र को अपनाकर ही रामराज लाया जा सकता है।