देव देवेश्वर व मां ललिता देवी के किए दर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
नैमिषारण्य(सीतापुर)। सावन की सोमवती अमावस्या पर नैमिषारण्य में श्रद्वालुओं की काफी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने चक्रतीर्थ व गोमती नदी में डुबकी लगाकर मां ललिता देवी व देव देवेश्वर का दर्शन-पूजन कर पुण्य कमाया।
इस अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता है कि सावन में ही वर्षा ऋतु की शुरुआत होती है। सोमवती अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा और पितरों का तर्पण किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिविधान से पूजा की जाती है। साथ ही पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध-तर्पण भी किया जाता है। अमावस्या तिथि पर नाभि गया, नैमिषारण्य तीर्थ के गोमती व चक्रतीर्थ स्नान का विशेष महत्व होता है। नैमिषारण्य के भूतेश्वर नाथ, देवदेवेश्वर मंदिर, रुद्रावर्त तीर्थ, काशी विश्वनाथ, सिद्धेश्वरनाथ व महामृत्युंजय मंदिर समेत सभी प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव के साथ पूजापाठ कर शीश नवाया। चक्रतीर्थ स्थित भूतेश्वर नाथ मंदिर के सुबह चार बजे कपाट खोले गए और जलाभिषेक हुआ। भगवान शिव का बेलपत्र, धतूरा, बेल व सुगंधित पुष्प से भव्य शृंगार कराया गया। श्रद्धालुओं ने चक्रतीर्थ व गोमती नदी में स्नान, आचमन कर दान व पूजन किया। इसके बाद नगर के प्रमुख मंदिर ललिता देवी, व्यास गद्दी, हनुमानगढ़ी, सूत गद्दी, शौनक गद्दी, बालाजी मंदिर, कालीपीठ, सत्यनारायण सन्निधि आश्रम व देव देवेश्वर आदि मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। एसडीएम अभिषेक शुक्ला, सीओ सुशील यादव व थाना प्रभारी दिग्विजय पांडेय पूरे दिन मेले का निरीक्षण करते रहे। वहीं, लहरपुर के सूर्य कुंड मंदिर प्रांगण के पवित्र सरोवर में श्रद्धालुओं ने स्नान कर मनोकामना पूर्ण करने के लिए भगवान कामेश्वर नाथ की पूजा-अर्चना की।
मां सोनासरी देवी मंदिर में गूंजे जयकारे
सीतापुर। सेवता में सोमवती अमावस्या पर सुबह पांच बजे से ही मां सोनासरी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं का आना प्रारंभ हो गया। मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंजने लगा। मिश्रिख के दधीच कुंड तीर्थ में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। उत्तरेश्वर और दक्षिणेश्वर महादेव मंदिर में पूजन-अर्चन किया। महर्षि दधीचि, बालाजी मंदिर, हनुमान मंदिर व सत्यनारायण भगवान मंदिर के दर्शन किए।