जिले के गांजरी क्षेत्र में अब बाढ़ का भयावह रूप सामने आ रहा है। शनिवार को रामपुर मथुरा क्षेत्र में दो बालिका बाढ़ के पानी में डूब गईं। हादसे में एक बालिका की डूबने से मौत हो गई, जबकि दूसरी को बचा लिया गया है। बीते तीन दिनों में बाढ़ में डूबकर मरने वालों की संख्या तीन हो गई है। वहीं घाघरा नदी पचीसा टापू पर कहर बरपा रही है। शुक्रवार रात टापू की सात झोपड़ियां नदी में समा गई हैं। शनिवार को बाढ़ के पानी में डेढ़ फीट तक की गिरावट देखी गई है।
रामपुर मथुरा क्षेत्र के 60 गांव घाघरा व चौका नदी में आई बाढ़ की चपेट में हैं। शनिवार को धामूपुरवा निवासी कीढ़ी लाल की पुत्री उर्मिला देवी (12) व परशुराम की पुत्री मोहिनी देवी (13) गांव के बाहर खेतों की तरफ गईं थीं। बताते है कि खेत इन दिनों बाढ़ की चपेट में हैं। दोनों बालिकाएं जैसे ही उधर से गुजरी, तेज बहाव में बहती चली गईं। गहरे पानी में पहुंचने के कारण दोनों डूब गईं।
हालांकि ग्रामीणों ने शोर सुनते ही पानी में छलांग लगा दी। करीब 10 मिनट में ही मोहिनी को बाहर निकाल लिया गया लेकिन उर्मिला डूब गई। काफी मशक्कत के बाद उसका शव उतराता मिला। मोहिनी को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बीते तीन दिनों में बाढ़ में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। वहीं रेउसा में घाघरा का कहर जारी है।
इस क्षेत्र में बाढ़ के पानी में करीब डेढ़ फीट की गिरावट देखी गई है, लेकिन नदी ने कटान तेज कर दी है। शुक्रवार रात पचीसा टापू पर बसे विनोद, रिंकू, पेशकार, उमेश, हरद्वारी, जीवन लाल व बचन लाल की झोपड़ियां नदी में बह गईं। क्षेत्र के कई संपर्क मार्गों से बाढ़ का पानी हट गया है, लेकिन अभी भी अधिकांश संपर्क मार्ग डूबे हुए हैं। क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि पानी में मामूली गिरावट आई है, लेकिन बैराजों से छोड़ा जा रहा पानी और मुसीबत खड़ी कर सकता है।
बाढ़ग्रस्त इलाके में इन दिनों पानी घट रहा है, लेकिन उसके साथ ही संक्रामक रोग पांव पसारने लगे हैं। हालत यह है कि पूरे के पूरे परिवार बीमार पड़े हैं। पानी घटने से कीचड़ व जलभराव की समस्या हर तरफ नजर आ रही है। बिल्लर पुरवा गांव के त्रिभुवन का पूरा परिवार इन दिनों बुखार से पीड़ित है। परिवार में त्रिभुवन, त्रिभुवन की पत्नी शंकुतला देवी (25), पुत्र शिवा (8), आशीष (4) आदि बुखार से पीड़ित हैं। इसी गांव के विमल (35) भी बुखार से पीड़ित हैं। गांव में अन्य लोग भी बीमार हैं।
जहां एक तरफ बाढ़ अपना कहर बरपा रही है, वहीं बाढ़ के पानी में बहकर आया मगरमच्छ लोगों को भयभीत कर रहा है। यह मगरमच्छ अब नदी के बजाय आबादी के करीब पहुंच रहा है। एक सप्ताह पहले इस मगरमच्छ को कोनी गांव के निकट देखा गया था। शनिवार सुबह परमेश्वर पुरवा के निकट मगरमच्छ बैठा नजर आया। गांव के राम नरेश, सुमिरन लाल, लालजी, दुखहरन आदि का कहना है कि उन्होंने मगरमच्छ को गांव के करीब देखा है। वह सूखे स्थान पर पहुंचकर बैठ जाता है
बाढ़ग्रस्त इलाके में बाढ़ का पानी तो घट गया है, लेकिन अभी तक बाढ़ टली नहीं है। बाढ़ का पानी अब भी रेउसा व थानगांव कस्बे तक दस्तक दे रहा है। जो पानी आबादी में घुस गया था, वह अब भी जस का तस बना हुआ है। इतना जरूर है, कि खेतों में फसलें बाढ़ के पानी से उबरती नजर आ रही हैं। बहुत से खेतों में धान की फसल पूरी तरह से अब भी जलमग्न हैं।