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मोबाइल पर मां का फोटो देख भर आईं आंखें, बहन का शव देख चीख पड़ी मासूम

Wed, 25 Oct 2017 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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जिस उम्र में उसे माता-पिता का दुलार मिलना चाहिए, उस उम्र में नन्हीं सी जान पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। गुड्डा-गुड़ियों से खेलने की उम्र में घायल बच्ची को अपनों के शवों की शिनाख्त को मजबूर होना पड़ रहा है।
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बुधवार को पुलिस ने लखीमपुर खीरी के मैगलगंज में मृत मिली उसकी मां व एक अन्य बहन की फोटो दिखाई तो वह चीख पड़ी। अपनों से बिछड़ने का गम उस पर भारी पड़ गया। बिलखती बच्ची को देख हर किसी की आंखें भर आईं। बिहार की रहने वाली अल्बुल खातून जनसेवा एक्सप्रेस में हुई घटना को याद कर आज भी रोने लगती है। 

बिहार के मोतिहारी जिले के जहांकलां निवासी इद्दू की पुत्री अल्बुल को उसकी मां व तीन बहनों के साथ पिता इद्दू तथा चाचा इकबाल ने सोमवार रात चलती हुई ट्रेन से फेंक दिया था। इनमें अल्बुल (8) व सलीमा (4) रामकोट के भवानीपुर व गोरा गांव के निकट पड़ी मिली थीं।
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जबकि मानपुर में रमईपुर हाल्ट के निकट उसकी बहन मुन्नी (5) का शव पड़ा हुआ था। देर शाम इन्हीं बच्चियों की बड़ी बहन रबिया (9) महमूदाबाद के गुलरामऊ क्रॉसिंग के निकट घायल पड़ी मिली थी। बुधवार को मैगलगंज के खखरा के निकट इन बच्चियों की मां आफरीन का भी शव बरामद हो गया।

पुलिस को जरूरत थी दोनों शवों की शिनाख्त व घायल रबिया को जिला अस्पताल में भर्ती बच्चियां पहचान लें। इस वजह से पुलिस अल्बुल को बुधवार सुबह अस्पताल से पोस्टमार्टम हाउस ले गई। वहां पर उसकी बहन मुन्नी का शव रखा हुआ था।

शिनाख्त कार्रवाई के लिए जैसे ही अल्बुल को मुन्नी का चेहरा दिखाया गया। वह चीख पड़ी और रो रोकर कहने लगी, कि ई तो मुनिया बा, ई तो मुनिया बा। पुलिस बाबू ई कुछ बोलत काहे नाय, बतावा। मासूम के इन शब्दों को सुनकर लोगों के आंसू छलक आए।

वहीं पुलिसकर्मी दिलासा दे रहे थे कि मुन्नी को कुछ नहीं हुआ, वह जल्द ठीक हो जाएगी। मासूम भी उनकी झूठी दिलासा में आई गई और बोली जल्दी से ईका ठीक कर दें, हे बाबू। पुलिस ने जिला अस्पताल में मां के शव व घायल बहन की फोटो उसे मोबाइल पर दिखाइ तो अल्बुल की आंखों से आंसू निकल आए।

वह रो-रोकर पूछ रही थी, कि क्या हुआ। ई कहां हैं। शिनाख्त के लिए आए पुलिस कर्मी भी अपने आंसू पोंछते दिखे। बच्ची भी यह जान नहीं सकी कि उसकी बहन व मां उसे छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए दूर चली गईं हैं।
 
मदद ही इंसानियत का मजहब 
 
बच्चियों को ट्रेन से फेंके जाने की खबर अखबारों में पढ़ने के बाद कई हाथ मदद को उठे। लोग अस्पताल पहुंचे और बच्चियों का कुशलक्षेम पूछा। समाजसेवी सचिन जायसवाल भी ऐसे लोगों में शामिल थे।

वह जिला अस्पताल में भर्ती दोनों बच्चियों के लिए कपड़े, टॉफी, बिस्किट व फल लेकर पहुंचे थे। इसी बीच शहर के अनुभव सक्सेना, सरताज, विक्की सिंह, रूपेंद्र पाल, सफीक, निजाम गाजी, शमीम बेग आदि भी जिला अस्पताल पहुंचे। ये लोग अपने साथ टॉफी व फल लेकर गए थे। सदर विधायक राकेश राठौर ने भी घायल बच्चियों से मुलाकात की और डॉक्टरों से उनके इलाज से संबंधित जानकारी ली। 
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