लहरपुर से बिसवां मार्ग पर शारदा नहर में बस पलटने से हुए हादसे के बाद उसमें फंसे लोगों को राहत पहुंचाने में प्रशासनिक अमला पूरी तरफ फेल नजर आया। न समय से जिम्मेदार पहुंचे और न पर्याप्त संसाधन। हालांकि स्थानीय लोगों ने जरूर अपनी जान जोखिम में डालकर शारदा नहर में फंसे लोगों को जरूर समय से निकाल लिया। सीतापुर मुख्यालय महज 40 किलोमीटर दूर हुए हादसे के बाद करीब दो घंटे बाद ही अफसर मौके पर पहुंच सके।
ग्रामीणों की मानें तो बस नहर में पलटने के बाद स्थानीय लोग राहत कार्य में जुटे रहे। प्रशासनिक अफसर खबर दिए जाने के करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। कई लोग नहर के तेज बहाव में बह चुके थे और कई की मौत हो चुकी थी।
बताते हैं कि लहरपुर रतिराम, बिसवां के एसडीएम उदय प्रताप सिंह व सीओ बिसवां शेषमणि पाठक घटनास्थल पर हादसे के करीब दो घंटे बाद पहुंचे। ये सभी अफसर अपनी-अपनी गाड़ियों से बगैर किसी संसाधन के ही पहुंच गए। उनके पहुंचने के बाद भी राहत पहुंचाने के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे।
इसके बाद ग्रामीणों ने धोती व रस्सी के सहारे बस के ऊपर खड़े व अंदर फंसे लोगों को ढांढस बंधाते हुए बाहर निकाला। शाम 5 बजे डीएम अमृत त्रिपाठी व एसपी सौमित्र यादव भी पहुंचे, लेकिन लेकिन फिर भी राहत कार्य में तेजी नहीं आ सकी।
इन अफसरों के पहुंचने के बाद बस को नहर से निकालने के लिए क्रेन बुलाई गई। क्रेन हादसे के बाद करीब पांच बजे घटनास्थल पहुंच सकी। शाम ढलते ही अंधेरा होने से राहत कार्य में थोड़ी सुस्ती आने लगी। प्रशासन ने वहां पर बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था की लेकिन नदी में उतरे गोताखोरों को कोई खास राहत नहीं मिली।