फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घरवालों को बंधक बनाकर सात लाख की डकैती

विज्ञापन
विज्ञापन
भागते समय एक डकैत को घर वालों ने दबोचा, बाकी ने गांव में फायरिंग कर फैलाई दहशत
विज्ञापन

बिसवां (सीतापुर)। कोतवाली इलाके में गुरुवार रात हथियारों से लैस आधा दर्जन नकाबपोश डकैतों ने एक घर पर धावा बोला। उन्होंने घरवालों को बंधक बनाकर नकदी व जेवर समेत लाखों की सम्पत्ति बटोर ली और हवा में फायर करते हुए भाग निकले। गोलियों की तड़तड़ाहट से इलाके में दहशत फैल गई। भागते समय एक डकैत की गृह स्वामी से झड़प हुई।

डकैत ने गृह स्वामी के सिर पर असलहे के बट से हमला भी किया। मगर घरवालों ने साहस दिखाते हुए उसे धर दबोचा। पकड़े गए डकैत को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। एसपी, एएसपी, एसओजी व डॉग स्क्वायड ने मौका-ए-वारदात का मुआयना किया। पुलिस ने डकैती का केस दर्ज कर खुलासे के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
विज्ञापन


कोतवाली क्षेत्र के शहरी सराय गांव में रात करीब 1:12 बजे आधा दर्जन नकाबपोश डकैतों ने मो. जमीर के मकान को धावा बोला। घर की दीवार के पास लगे ईंट के ढेर के जरिए छत पर चढ़कर एक डकैत ने अंदर से दरवाजा खोल दिया। इसके बाद सभी डकैत भीतर दाखिल हो गए।

एक कमरे का दरवाजा खुला देख डकैतों ने उसमें सो रहे जमीर के साले जमशेद को बंधक बना लिया। चहलकदमी सुनकर दूसरे घरवाले भी अपने-अपने कमरों से बाहर आ गए। जो भी बाहर आता डकैत असलहों के बल पर उसे बंधक बनाने के बाद हाथ-पैर बांधकर मुंह में कपड़ा ठूंस देते।

गृह स्वामी समेत घर के सात सदस्यों को डकैतों ने बंधक बनाकर अलमारियां खंगालनी शुरू कर दीं। गृह स्वामी के मुताबिक करीब 1 लाख 80 हजार रुपये की नकदी और साढ़े पांच लाख के जेवर बटोर कर डकैत ऊपर की मंजिल पर गए। वहां गृह स्वामी का छोटा भाई अब्दुल कदीर व उसकी पत्नी सो रहे थे।

कबीर ने डकैतों को ललकारा तो उलझने के बजाय डकैत सीढ़ियां उतरकर घर से बाहर निकल गए। मगर आपाधापी में एक डकैत घर के अंदर ही रह गया। जिसे कबीर ने दबोच लिया। उधर, घर से निकलकर डकैतों ने जब गांव में हलचल देखी तो दहशत फैलाने के लिए हवा में फायरिंग करते हुए भाग गए।

डकैतों द्वारा करीब छह राउंड गोलियां दागने से ग्रामीण सहमकर अपने-अपने घरों में दुबक गए। दबोचे गए डकैत को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। एसपी प्रभाकर चौधरी, एएसपी महेंद्र चौहान, एसओजी व डॉग स्क्वायड टीम ने घटना स्थल पर पहुंचकर गहनता से पड़ताल की है।

लखीमपुर के इस्लामनगर का है पकड़ा गया डकैत
घरवालों द्वारा पकड़ा गए डकैत की पहचान जिला लखीमपुर के थाना मितौली अंतर्गत इस्लामनगर निवासी राजू उर्फ हाशिम के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से एक 315 बोर का तमंचा, 2 कारतूस व मोबाइल बरामद किया है। एएसपी ने डकैत से बंद कमरे में लगभग आधा घंटा जबकि एसओजी प्रभारी अनिल यादव ने करीब 15 मिनट तक पूछताछ की।

प्राइमरी स्कूल में छिपे थे डकैत, जंगल में छिपाया था वाहन
डकैतों ने वारदात को अंजाम देने से पहले गांव के प्राइमरी स्कूल को अपना ठिकाना बनाया। डकैतों ने स्कूल के एक कमरे का दरवाजा तोड़कर कुछ देर उसके भीतर पनाह ली। इसके बाद वारदात को अंजाम दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान पता चला कि वारदात के बाद डकैत पड़ोस के गांव महमूदपुर के जंगल में पहुंचे। वहां पर डकैतों ने अपना वाहन छिपाया था फिर उसमें सवार होकर भाग गए।

तीन साल बाद हुई डकैती की वारदात
बिसवां इलाका चार दशक पहले तक कुख्यात डाकुओं के आतंक से थर्राता रहता था। नब्बे के दशक में गांजरी इलाके में दस्यु मेवा लोनिया और अनिल गोडिया उर्फ कालिया की दहशत हावी रहती थी। बिसवां में वर्ष 2015 के बाद अब यह डकैती की वारदात अंजाम दी गई है। इससे पहले 8 नवंबर 2015 को महिमापुर निवासी गुरचरन पासी के घर डकैती पड़ी थी। जिसमें छोटू की गोली लगने से ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

बंजारा गिरोह की ओर मुड़ी शक की सुई
वारदात के बाद जांच में पुलिस के शक की सुई बंजारा गिरोह ‘शरीफ’ पर टिक गई है। पुलिस इसी गिरोह द्वारा वारदात किए जाने का मानकर कार्रवाई आगे बढ़ा रही है। गिरोह का दबोचा गया एक सदस्य पुलिस के लिए खुलासे का मजबूत जरिया साबित होगा। पुलिस इसी कड़ी से आगे की कड़ियां जोड़ने की कवायद में जुट गई है।

टीमें गठित, जल्द होगा खुलासा
वारदात के जल्द खुलासे को लेकर टीमें गठित कर दी गई हैं। गिरोह का पकड़ा गया बदमाश पुलिस के लिए अहम जरिया साबित होगा। जल्द ही खुलासा कर दिया जाएगा।
-महेंद्र चौहान, एएसपी

कबीर की दिलेरी से डकैतों के पस्त हो गए हौसले
बिसवां (सीतापुर)। ...रात के करीब सवा बज रहे थे। बरबस ही कोई आवाज सुनकर नींद टूट गई। लगा नीचे कई लोग चहलकदमी कर रहे हैं। देर रात अजीब सी घुटी-घुटी आवाजें सुनकर नीचे चला आया। वहां का नजारा देखते ही एकबारगी होश उड़ गए। घर के सभी सदस्यों को बंधक बनाकर पांच डकैत असलहे तानकर उनके इर्दगिर्द खड़े थे।

एक डकैत नकदी व जेवर बटोर रहा था। मुझे देख एक डकैत तमंचा तानकर मेरी तरफ बढ़ा। उस वक्त मुझे एक आवाज सुनाई दी, लगा बड़े भाईजान कह रहे हैं बचाओ। बस खुदा ने पता नहीं कैसे इतनी ताकत दे दी कि मैं अपनी तरफ बढ़ रहे डकैत पर झपट पड़ा। डकैती के मंजर को बयान करते-करते कबीर की आंखों में दहशत साफ तैरने लगी।

मगर अगले ही पल उन्हीं आंखों में एक डकैत धर दबोचने का फख्र भी नुमाया हो गया। कबीर ने बताया कि डकैत से गुत्थमगुत्था होकर वह सीढ़ियों पर जा गिरा। खुदा की रहमत यह कि सीढ़ी से टकराकर डकैत के तमंचे की नाल टूट गई। लिहाजा, वह चाहकर भी फायर नहीं कर सका। इस मौके का फायदा उठाकर मैंने उसे कसकर दबोच लिया।

उधर, शोरगुल सुनकर गांव वाले भी जगने लगे थे। काम बिगड़ता देख डकैतों ने बाहर का रुख किया। रास्ता साफ करने के मकसद से डकैतों ने बाहर कई राउंड गालियां भी चलाई। घर के अंदर से डकैतों के निकलते ही छोटा भाई किसी तरह हाथ छुड़ाकर मेरी मदद करने आ पहुंचा।
विज्ञापन


डकैतों के निकलते ही गांव वाले भी आ गए। सबकी मदद से डकैत को काबू में कर लिया गया। पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने कबीर की इस दिलेरी पर उसकी पीठ थपथपाई। एसपी ने महकमे की ओर से उसे प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किए जाने का आश्वासन भी दिया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें