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सुहागिनों को दी गई विधवा पेंशन की होगी वसूली

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सीतापुर। परसेंडी के शेरपुर सरांवा में सुहागिनों को विधवा पेंशन देने के मामले में प्रोबेशन अफसर ने सारा दोष आंकड़ा विश्लेषक पर मढ़ दिया। साथ ही उसकी संविदा भी समाप्त कर दी। इससे विभागीय कार्रवाई पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। उधर, प्रोबेशन विभाग ने अवैधानिक रूप से भेजी गई पेंशनों को रोकते हुए लाभार्थियों से वसूली करने की तैयारी में जुट गया है।
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शासन से गरीब विधवाओं को पेंशन दिए जाने के सख्त आदेश हैं। जिससे यह ठीक प्रकार से जीवनयापन कर सकें। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। जिले में बैठे जिम्मेदार आदेश का दुरुपयोग कर रहे हैं। पात्र गरीब महिलाओं को पेंशन के लिए भटकना पड़ रहा है। वह दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। उन्हें पेंशन नहीं मिल पा रही है।

यही कारण है कि जिले को विधवा पेंशन देने के लिए जो लक्ष्य निर्धारित है। वह पूर्ण नहीं हो पा रहा है। आवेदन करने के बाद तमाम दौड़भाग के बाद जिन विधवाओं की पेंशन स्वीकृत हो गई हैं। उन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा है। विगत 16 नवंबर के अंक में अमर उजाला ने परसेंडी के शेरपुर सरांवा में 22 सुहागिनों को विधवा पेंशन देने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
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इसके छपने के बाद प्रशासन ने मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। इसकी जांच टास्क फोर्स अफसर को सौंपी गई है। उधर, इस प्रकरण में जिला प्रोबेशन अफसर अश्वनी कुमार ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञाप्ति जारी कर अपनी सफाई पेश की।

इसके जरिए कहा कि शिकायतकर्ता संदीप कुमार द्वारा 30 अक्टूबर को दिए शिकायती पत्र की जांच में पाया गया कि ब्लॉक एलिया के जगन्नाथपुर की निवासिनी रूबी सिंह के बचत खाता को मार्च में परिवर्तित किया गया। इसी परिवर्तन के कारण शिकायतकर्ता की पत्नी प्रियंका के खाते में वर्तमान वित्तीय वर्ष की प्रथम एवं द्वितीय तिमाही की राशि तीन हजार रुपये ऑनलाइन पहुंची।

इसके लिए आंकड़ा विश्लेषक सौरभ कुमार ने अपना स्पष्टीकरण दिया है। उसकी सेवा समाप्ति कर दी गई है। साथ ही यह भी बताया कि अवैधानिक रूप से भेजी गई विधवा पेंशनों को रोकते हुए लाभार्थियों से वसूली की जाएगी। इसके लिए विभागीय कार्रवाई की जा रही है।

शेरपुर गांव में प्रोबेशन दफ्तर के बाबू की चर्चा
शेरपुर गांव के कुछ ग्रामीणों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर यह बताया कि प्रोबेशन दफ्तर में पूर्व के बरसों में कार्यरत रहे एक बाबू ने 20 सुहागिनों के आवेदन एक कथित दलाल के द्वारा भरवाए थे। यह बाबू इस समय भी कार्यरत है। इनकी मंशा अपात्रों को पेंशन दिलाकर बड़े अफसर को फंसाने की थी। इसमें उनके एक स्वजातीय व्यक्ति ने सहयोग किया है।

फिलहाल सच्चाई चाहे जो हो, लोग विभाग के जिम्मेदारों की मामले में मिलीभगत होने की चर्चा कर रहे हैं। उनका यह भी कहना कि सम्पूर्ण जिले में कथित दलालों के मार्फत बड़े पैमाने पर यह खेल चल रहा है। यदि मामले को दबाया न गया और बारीकी से उच्च स्तरीय जांच हुई तो बड़ा घोटाला सामने आएगा।
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