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घाघरा की लहरें बढ़ा रहीं दिल की धड़कन

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कई गांवों के करीब पहुंचा पानी, तटीय क्षेत्र के बाशिंदों में मचा हड़कंप
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रेउसा/ सीतापुर। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश का असर गांजरी इलाके में दिखने लगा है। लगातार जलस्तर में वृद्धि से घाघरा एक बार फिर से बड़ी ही तेजी से बढ़ रही है। नदी में गिरने वाले नालों से बाढ़ का पानी तेजी से आबादी की तरफ चल रहा है। इससे तटीय क्षेत्र के बाशिंदों में हड़कंप भी है।

यही नहीं तटीय क्षेत्र के बाशिंदे सुरक्षित ठिकानों का रुख कर रहे हैं। उधर, बैराजों से छोड़ा जाने वाला पानी भी खतरे की घंटी बजा रहा है। बैराजों से गुरुवार को डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जलस्तर में बड़े पैमाने पर इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
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रेउसा क्षेत्र के दुर्गा पुरवा, कोनी, लोध पुरवा, कटैला पुरवा, जैतहिया आदि करीब 20 गांवों में घाघरा का पानी आबादी के बेहद करीब पहुंच गया है। तटीय इलाके की करीब 1500 बीघा से अधिक की खेती उफान मार रही घाघरा के बढ़े पानी में समा चुकी है।

चहलारी घाट, दुर्गा पुरवा, कटैला पुरवा के निकट नाले उफान मारने लगे हैं। जिनसे घाघरा का पानी निकलकर आबादी की तरफ बढ़ रहा है। अभी तक ये नाले आबादी के पानी को घाघरा में गिराने के काम आते थे, लेकिन नदी के उफान मारने से पानी वापस आबादी की तरफ जा रहा है।

जिस तेजी से नदी का पानी बढ़ रहा है, उसे देखकर तटीय क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि एक या दो दिन में बाढ़ की नौबत आ जाएगी। उधर गुरुवार को शारदा व घाघरा बैराजों से 1,51,632 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। माना जा रहा है कि जिस वक्त यह पानी सीतापुर जिले से गुजरेगा, नदी का पानी उफान मारकर बाहर आ जाएगा।

इससे तटीय इलाकों में बाढ़ आना लगभग तय ही है। यहां बता दें कि नदी अभी महज दो फीट नीचे ही बह रहा है। लेकिन नदी के पानी में उठती लहरें तट के बाहर तक आ रही हैं। उधर पहाड़ों से गुरुवार को भी कोई राहत भरी खबर नहीं मिली है। वहां पर हुई बारिश की वजह से बनबसा बैराज पर जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

जिसके चलते बनबसा बैराज से गुरुवार को 1,34,232 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इतनी मात्रा में छोड़ा गया पानी जिले के गांजरी इलाके से गुजरते वक्त मुसीबत का सबब जरूर बनेगा। जिससे एक या दो दिन में बाढ़ आना लगभग तय ही माना जा रहा है। इधर प्रशासन हर स्थिति से निपटने की तैयारी पूरी होने की बात कह रहा है।

20 गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
घाघरा का जलस्तर जिस तेजी से बढ़ रहा है। उससे तटीय इलाके के नगीना पुरवा, कटैला पुरवा, जैतहिया, मरेली, कोनी, लोध पुरवा, दुर्गा पुरवा, दर्जिन रेती, श्याम नगर,परमेश्वर पुरवा सुंदर नगर आदि 20 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यदि जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुई, तो एक या दो दिन में बाढ़ का पानी इन गांवों में प्रवेश कर जाएगा।

नदी में कम हुई कटान
जब घाघरा में पानी कम था, तब नदी कोनी, परमेश्वर पुरवा, दर्जिन रेती, नगीना पुरवा के निकट तेजी से कटान कर रही थी। लेकिन इधर जब नदी के पानी ने उफान मारा है, तब कटान थम गया है। लेकिन अब लोग बाढ़ की आहट से डरे हुए हैं।

मारू बेहड़ का कर रहे रुख
रेउसा क्षेत्र में घाघरा के तटीय क्षेत्र में बसे ग्रामीणों को मारू बेहड़ सबसे सुरक्षित स्थान प्रतीत हो रहा है। यही वजह है कि जो भी ग्रामीण बाढ़ के भय से अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं। वे मारू बेहड़ पहुंचकर डेरा डालने का इंतजाम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बार अधिकांश परिवार मारू बेहड़ के निकट ही अपना आशियाना बनाएंगे।

...तो चहलारी मार्ग बन जाएगा आबादी
गांजरी क्षेत्र में सीतापुर से बहराइच जाने वाला चहलारी मार्ग बाढ़ से बचाने के लिए ग्रामीणों को सबसे सुरक्षित स्थान नजर आ रहा है। अभी तो इस मार्ग पर वाहन सरपट दौड़ रहे हैं, लेकिन बाढ़ आने के वक्त इस मार्ग पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यह मार्ग काफी ऊंचा है।

वहीं मार्ग के आसपास की आबादी तो बाढ़ की चपेट में आ जाती है, लेकिन यह मार्ग बाढ़ की चपेट में नहीं आता है। यही वजह है कि बाढ़ पीड़ित इसी सड़क पर झोपड़ी डालकर अपना गुजर बसर करने लगते हैं। वह दिन दूर नहीं, जब बाढ़ के वक्त यह मार्ग आबादी के रूप में नजर आएगा।
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जलस्तर बढ़ा पर बाढ़ नहीं
घाघरा के जलस्तर में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन अभी बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। नदी व तटीय इलाकों पर नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ते ही मदद के लिए प्रशासन की टीमें पहुंच जाएंगी।
-शशिभूषण, एसडीएम
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