सीतापुर। जिला अस्पताल में बेड का संकट दूर नहीं हो पा रहा है। जिम्मेदार भी इस संकट के विकल्प तलाशने में फेल हो रहे है। इसका असर यह है मरीज बेंच पर लेटकर इलाज करा रहे है तो कई बेड के अभाव में भर्ती नहीं हो पाते हैं। यह हालात जिला अस्पताल में गुरुवार को नजर आए।
जिला अस्पताल की क्षमता 230 बेड की है। इस समय मरीजों की तादाद बढ़ गई है। अस्पताल में एक-एक बेड की किल्लत बनी हुई है।
हाल यह है करीब 260 मरीज अस्पताल में भर्ती है। महिला वार्ड व मेडिकल वार्ड पूरी तरह से फुल है तो मरीज बेंच पर लेटकर इलाज कराने को मजबूर है। यह समस्या अधिकतर बनी रहती है। इस समस्या को कैसे दूर किया जाए, इसके लिए अफसर भी कोई विकल्प तलाशने में असफल हो रहे है।
बेड जल्दी खाली हो जाए इसलिए मरीजों को हल्का सा सुधार होने पर छुट्टी दे दी जाती है। महिला वार्ड में बेंच पर लेटी विमला ने बताया पेट दर्द सहित अन्य समस्या होने पर भर्ती हूं। बेड के अभाव में बेंच पर बहुत दिक्कत आती है। रात के समय करवट लेने पर गिरने का डर बना रहता है।
उल्टी-दस्त की शिकायत पर भर्ती रमेश ने बताया एक दिन पहले ही भर्ती हुआ था। पूरी तरह से सुधार नहीं हुआ डॉक्टर से कहा तो बोले-घर जाकर आराम करो। हर्ष ने बताया एक ही दिन बाद छुट्टी कर दी गई। घर गए तो फिर से उल्टियां आनी शुरु हो गई। अस्पताल आने पर बेड नहीं मिला तो मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करवाया।
सुबह-शाम दो बार हो रही मॉनीटरिंग
बेड का संकट खड़ा हो रहा है तो बेड को लेकर दो बार मॉनीटरिंग हो रही है। सुबह चिकित्सक राउंड पर जाकर मरीजों का हालचाल लेते हैं। सुधार होने पर ही छुट्टी की जाती है। इसी तरह शाम के समय फिर से मॉनीटरिंग होती है। अगर मरीजों की रिपोर्ट में थोड़ा भी सुधार होता है तो उन्हें घर जाने के लिए बोल दिया जाता है।
भर्ती होने पर भी सिफारिश
अस्पताल में भर्ती होने के लिए सिफारिश हो रही है। चिकित्सकों से कहा गया है अगर बहुत गंभीर मरीज हो तभी उसे भर्ती करें। वर्ना सामान्य इलाज देकर घर पर ही रहने की सलाह दे। ऐसे में कई मरीज गुरुवार को भर्ती होने के लिए सिफारिश करते हुए नजर आए। कोई चिकित्सक से सिफारिश कर रहा था तो कोई अस्पताल के ही कर्मी को बुलाकर भर्ती होने की बात कह रहा था।
नया भवन बनने तक रहेगी दिक्कत
अस्पताल में बेड की किल्लत बनी हुई है। जब तक नया भवन नहीं बनेगा तक तक दिक्कत रहेगी। मरीज अधिक आ रहे है ऐसे में हल्के मरीजों को जल्दी छुट्टी करके गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
डॉ. आरके सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल