सीतापुर। जिले में चल रही गन्ना मिलों का पेराई सत्र शुरू हो गया है। गन्ना किसान मेहनत से उगाए गन्ने को मिल तक पहुंचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। इस दौरान इन गन्ना किसानों को ठगने के लिए एजेंट भी सक्रिय हो गए हैं। ऐलिया ब्लॉक के टिकरा बाजार, इमलिया सुल्तानपुर, फरर्कपुर, चांदूपुर व अन्य जगहों पर खुलेआम अवैध गन्ना मंडियां चल रही हैं। अमर उजाला ने गन्ना बिक्री के इस खेल की पड़ताल की तो चौकाने वाले खुलासे हुए। पता चला कि ये एजेंट किसी भी किसान का गन्ना खरीदकर उसे मिल में सप्लाई कर देते हैं। संवाददाता ने ऐसे ही एक एजेंट से बात की।
गन्ना एजेंट से संवाददाता की बातचीत के कुछ अंश
संवाददाता : हेलो! भइया इस समय गन्ने का रेट क्या चल रहा है।
एजेंट : इस समय रेट बहुत गिर गया है... गन्ने की किस्म 38 का रेट 240 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।
संवाददाता : ज्यादा गन्ना हो तो रेट क्या मिलेगा।
एजेंट : चाहे जितना गन्ना हो रेट इसी तरह रहेगा। तीन दिन में दस-दस रुपये प्रति क्विंटल रेट कम हुआ है।
संवाददाता : चीनी मिल में गन्ना कैसे पहुंचाया जाए।
एजेंट: दलालों से पर्ची लेकर पहुंचाया जा सकता है। (वर्ष 2017 में विधानसभा से चुनाव लड़ चुके एक पूर्व प्रत्याशी व दो बार अवध शुगर मिल के चेयरमैन रह चुके व्यक्तियों का नाम लेकर) उनसे पर्ची का जुगाड़ हो जाएगा। उनके पास अतिरिक्त पर्ची आती है। गन्ने जगह उनके खेत में धान लगा है।
संवाददाता: ठीक है। उनसे जुगाड़ करवा दो। कोई नंबर हो तो दे दो।
एजेंट: ठीक है। नंबर देता हूंं। काम हो जाएगा। (इसके बाद फोन काट दिया)
गन्ना सर्वे के समय सक्रिय हो जाता सिंडिकेट
अमर उजाला के संवाददाता ने गन्ने की दलाली के सिंडिकेट में शामिल एजेंट से बातचीत की। उसने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित गन्ना मूल्य से करीब सौ रुपये सस्ता गन्ना बेचना किसानों की मजबूरी है। पेड़ी की फसल की पर्ची गन्ना मिलों द्वारा समय से उपलब्ध नहीं कराई जाती है, जिससे किसानों के आगे खेत को मजबूरी में खाली करने के लिए गांव-गांव घूमने वाले इन एजेंट का सहारा लेना पड़ता है। दूसरी ओर जिन लोगों के खेत में गन्ना बोआ नहीं गया है, उनका नाम सर्वे में शामिल कर उन्हें समय से पर्चियां दे दी जाती हैं। इन्हीं पर्चियों के आधार पर ये एजेंट गन्ना किसानों को ठग लेते हैं। गन्ना एजेंट ही गन्ने का मूल्य न्यूनतम करीब 200 रुपये निर्धारित कर देते हैं। बाद में सरकारी रेट पर इसे मिल में सप्लाई कर हजारों रुपये कमाते हैं। इस खेल में गन्ना पर्यवेक्षक से लेकर मिल के अधिकारी तक शामिल रहते हैं। वहीं, जब गन्ना मिल पहुंचता है तो कोई भी अधिकारी इस बात की जांच नहीं करता है कि गन्ना उसी खेत का है, जिसे पर्ची भेजी गई या नहीं।
सुबह छह बजे सज जाती मंडियां
टिकरा में आलम यह है कि महोली-हरगांव मार्ग पर सड़क के बीचोंबीच गन्ने की दलाली होती है। इससे आवागमन बाधित रहता है। एजेंट बिना पर्ची वाले किसानों को गन्ने की गुणवत्ता कम बताकर औने-पौने दामों पर गन्ना खरीदकर मिल को सप्लाई कर रहे हैं। सुबह 6 बजे से ही इन स्थानों पर गन्ना मंडियां सज जाती हैं। एजेंट ऐसे किसानों की तलाश में रहते हैं, जिनके पास गन्ना तो है लेकिन मिल से पर्ची नहीं पहुंच पाई है। एजेंट इन्हें दौड़भाग का डर दिखाकर व तत्काल पैसे के भुगतान का लालच देकर बरगला लेते हैं।
टीमें लगातार करती हैं जांच, मामले को दिखवाएंगे
गन्ना किसानों को कोई ठगने न पाए, इसका पूरा ध्यान रखा जाता है। हाल ही में रेउसा क्षेत्र में कार्यवाही कर दलालों पर अंकुश लगाया गया है। गन्ना समितियों के सचिवों को भी सघन निगरानी करने का निर्देश है। आपके माध्यम से यह मामला संज्ञान में आया है, इसे भी दिखवाया जाएगा।
- रत्नेश्वर त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी