सीतापुर। गांजरी इलाके में कहर ढाने वाली घाघरा, कनरखी, चौका और शारदा नदियों सहित बैराजों के जल स्तर में पिछले चौबीस घंटों के दौरान गिरावट भले ही दर्ज की गई हो, लेकिन यहां के बांशिदों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। रेउसा ब्लाक में बहने वाली घाघरा नदी ने विकास खंड के काशीपुर, गोड़ियन पुरवा, असईपुर, बाजपेयीपुरवा, चमारनपुरवा, मटेरिया, खमहरिया, शेखपुर, मल्लापुर, नगीनापुरवा, श्यामनगर, चंद्रभाल पुरवा, कोनी और सिसईया बाजार आदि गांवों में इस साल काफी तबाही मचाई है। काशीपुर और मल्लापुर के लगभग 400 परिवार सड़क ों के किनारे आशियाने बनाए हुए हैं। ग्राम कुलिया, छड़िया, राज पुर, केवटाना, काशीपुर, जटपुरवा सहित घाघरा नदी के दर्जनों तटवर्ती गांव बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे हैं। पिछले 48 घंटों के दौरान गांजरी इलाके की घाघरा, शारदा, कनरखी और चौका आदि नदियाें के जल स्तर में लगातार कमी आने के बाद भी यहां के बांशिदों के सामने रोजी-रोटी का संकट बरकरार है। जिन ग्रामीणों के घर नदी में समा गये हैं, उनके सामने अब सिर छिपाने की समस्या आ खड़ी हुई है। इनके पास न तो तन ढ़कने को कपड़ा बचा है और न खाने को अनाज। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दस दिनों से राशन, लंच पैकेट या मिट्टी के तेल का वितरण नहीं हुआ है। बाढ़ में मक्का, धान, गन्ना, मेंथा आदि की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मिट्टी का तेल न होने के कारण इन बाढ़ पीड़ितों की रातें अंधेरे में गुजरती हैं। आसपास लगे सरकारी और निजी हैंडपम्प नदियों के उफनाए पानी में डूब चुके हैं। पीने के साफ पानी की किल्लत हो रही है। जिन गांवों में बाढ़ का पानी भरा है उनके संपर्क मार्गों पर भी जल भराव होने से आवागमन ठप है। इस बाबत उपजिलाधिकारी सिधौली मृत्युंजय राम ने बताया कि काफी लोग ऐसे हैं जिनका अनाज भी घरों के साथ ही जलमगभन हो गया है ओर उन्हें तत्काल सहायता की जरूरत है। प्रशासन पूरा प्रयास कर रहा है कि लोगों को जल्द से जल्द राहत उपलब्ध करायी जा सके।