सीतापुर। गन्ना खरीद को लेकर सहकारी चीनी मिल प्रबंधन व किसान आमने-सामने हैं। इसकी जड़ गन्ने की 5191 प्रजाति है। गुरुवार को रेउसा में किसानों के जाम लगाकर प्रदर्शन करने से यह बड़ा मुद्दा बन गया। सेवता विधायक ज्ञान तिवारी व मुख्य गन्ना अधिकारी महेंद्र कुमार ने फिलहाल तो हालात संभाल लिए लेकिन यह मामला अभी शांत होता नहीं दिख रहा है। इस प्रजाति के गन्ने का वजन कम निकलता है जिससे किसान और मिल दोनों का नुकसान होता है।
किसानों ने इस मसले का समाधान नहीं होने पर एक सप्ताह बाद फिर आंदोलन की चेतावनी दी है। किसानों का आरोप है कि 5191 प्रजाति का गन्ना मिल खरीद नहीं रही है। मिल प्रबंधन का तर्क है कि किसान इस प्रजाति के गन्ने को समय से पहले ला रहे हैं। तय पर्ची के हिसाब से गन्ना लाने वाले किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो रही है। यह पेंच आखिर फंसा क्यों, इसे समझने के लिए हमने किसानों, गन्ना विभाग के अफसरों व महमूदाबाद मिल प्रबंधन से बात की।
वजह यह निकलकर सामने आई कि मिल प्रबंधन व किसानों के बीच आपसी तालमेल के अभाव में हालात बिगड़े हैं। जिले में 3 लाख 45 हजार 938 गन्ना किसान हैं। यहां 2 लाख 19 हजार 876 हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती की जा रही है। चार निजी व एक सरकारी समेत पांच चीनी मिलें संचालित हैं। जिले से काफी मात्रा में गन्ना गैर जनपद की पांच मिलों को भी सप्लाई किया जाता है। गन्ने की मुख्यत: तीन प्रजातियां मानी गई हैं। अर्ली, मिड और लेट। पर्ची कैलेंडर के हिसाब से जारी की जाती है।
गन्ना विभाग ने 12 पखवाड़े (180 दिन) का कैलेंडर बनाया है। शुरुआत के चार पखवाड़े यानी 60 दिन तक अर्ली की पर्चियां जारी की जाती हैं। इसके बाद मिड फिर लेट गन्ने की पर्ची दी जाती है। गन्ना 5191 सामान्य प्रजाति में है। वर्तमान में इसे काटकर बेचने से किसान का भी नुकसान हैं, क्योंकि वजन कम निकलेगा। मिल का नुकसान यह कि इस गन्ने से चीनी कम निकलेगी। किसान अर्ली की पर्ची पर सामान्य प्रजाति का गन्ना लेकर पहुंच रहे हैं, इसलिए सेंटर पर तौल से मना कर दिया जाता है। इस पर किसान आक्रोशित हो जा रहे हैं। समय से पहले 5191 गन्ना काटने से कम वजन होने पर किसान भी नुकसान उठा रहे हैं।
किसानों से पिछले सत्र में 5191 प्रजाति का गन्ना लगाने से मना किया जा चुका है। इसके बाद भी कुछ किसानों ने इस प्रजाति का गन्ना लगाया है। अभी अर्ली गन्ने की पर्ची जारी की गई है। कुछ किसान पर्ची से अलग हटकर 5191 गन्ना लेकर पहुंच रहे हैं। इसलिए सेंटर पर तौल करने से मना किया जा रहा है। फिर भी एक बार किसानों का 5191 गन्ना तौलने को कह दिया गया है। मगर दूसरी बार यदि कोई किसान पर्ची से हटकर इस प्रजाति का गन्ना लाएगा तो उसका सट्टा ब्लॉक करने की कार्रवाई होगी।