सीतापुर। बेसिक शिक्षा विभाग में नौनिहालों को जल्द पाठ्य पुस्तकें मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। जिले को करीब 31 लाख पुस्तकों की जरूरत है। नये शैक्षिक सत्र के करीब साढ़े तीन माह में महज एक लाख पुस्तकें ही मिल सकी हैं। यह किताबें एक ब्लॉक के नौनिहालों की जरूरतें भी पूरी नहीं कर सकती। ऐसे में न इनका सत्यापन हुआ और न ही वितरण हो सका है। एक सप्ताह से जिले में एक भी पुस्तक नहीं आई है। ऐसे में नौनिहालों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
परिषदीय विद्यालयों का शैक्षिक सत्र अप्रैल से शुरू हुआ था। उसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि मई माह तक पुस्तकें नौनिहालों को मिल जाएंगी। जुलाई माह में पुस्तकों के मिलने की आस थी। लेकिन अब यह आस भी अधूरी ही रह गई है।
अगस्त की शुरुआत हो गई है यानी साढ़े तीन माह सत्र के गुजर जाने के बाद नौनिहाल बिना पुस्तकों के ही पढ़ रहे है। जिले में करीब छह लाख नौनिहालों के लिए 31 लाख पुस्तकों की जरूरत है। लेकिन अभी तक महज एक लाख ही पुस्तकें जिले को मिली हैं। यह पुस्तकें भी कई विषयों की है। अगर विभाग इनका वितरण करना चाहे तो वह एक ब्लॉक को भी नहीं दे सकता है। ऐसे में ये पुस्तकें केवल दिखावा बनकर रह गई हैं। नौनिहाल फटी पुरानी किताबों से पढ़ रहे हैं।
टेंडर में नहीं दिखाई रुचि, दोबारा प्रक्रिया शुरू
शासन से जिले को पुस्तकें मिलने के बाद इनको बीआरसी पर पहुंचाया जाएगा। इसके बाद खैराबाद से बीआरसी को पुस्तकें पहुंचाई जाएंगी। ये पुस्तकें पहुंचाने के लिए वाहनों की व्यवस्था के लिए जैम पोर्टल से टेेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी। पहले चरण में किसी भी फर्म ने पुस्तकें की डिलीवरी के लिए टेंडर नहीं डाला।
इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने दोबारा टेंडर के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में अगर जिले में पुस्तकें आ भी जाए तो इनको बीआरसी तक पहुंचना आसान नहीं होगा। वाहनों का टेंडर नहीं हो सका है। प्रभारी पाठ्य पुस्तक प्रमोद गुप्ता ने बताया जिले में बहुत ही कम पुस्तकें आई है। टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
शासन से जिले को बहुत ही कम पुस्तकें मिली हैं। जरूरत के मुताबिक पुस्तकें मिलने पर इनका वितरण कराया जाएगा। तब तक पुरानी किताबों के जरिए पढ़ाई कराई जा रही है।
- अजीत कुमार, बीएसए