इमामबाड़ा कला में गुलदस्ता मातम के सालाना अशरे की पहली मजलिस हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमामबाड़ा कला में गुलदस्ता मातम के सालाना अशरे की पहली मजलिस शुक्रवार रात को हुई। मौलाना मोहम्मद हसन ने शिक्षा की अहमियत और इस्लाम की विशेषता पर विस्तार से रोशनी डाली और लोगों से नेकी और भलाई के रास्ते पर चलने की अपील की।
मौलाना मोहम्मद हसन ने कहा की क़ुरआन की रौशनी में हर दौर में रसूले इस्लाम और अहलेबैत ने शिक्षा कर प्रसार किया। इस्लाम की नजर में हर वो इंसान जो दुनिया में आया है, उसे शिक्षित होना चाहिए। विशेष रूप से हर मुसलमान पर इल्मे दीन और दुनिया को हासिल करना फर्ज है। जिससे वह हलाल व हराम में फर्क जाने और दीन की सही समझ बूझ कर सके। साथ ही कुदरत के कानून और जीवन के उद्देश्य को समझना भी आसान हो। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने दीनी और तारीखी लिहाज से कभी भी इल्म की मुख़ालेफ्त यानी विरोध नहीं की है, बल्कि इस्लाम ने इसके उलटा अपनी शुरुआत से इल्म हासिल करने का हुक्म दिया। और बहुत सी आयतें और रिवायतें इल्म और आलिम की अहमियत को बयान करती हैं। इस्लाम में इल्म का मकाम स्थान बहुत बड़ा है। इल्म हासिल करना एक दीनी फरीजा धार्मिक कर्तव्य समझा गया है और इस्लाम में इल्म के बारे में कोई सीमित दायरा नहीं है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।