डुमरियागंज। क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमाम बारगाह हुसैनिया अली हसन में बुधवार की रात अंजुमन फिदा-ए-कासिम के बैनर तले तरही शब्बेदारी का आयोजन किया गया। इसमें मर्सिया मजलिस आयोजित की गई। अकीदतमंदों ने सारी रात नौहा पढ़ा। इस दौरान मातम भी किया गया। कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र मशहूर नौहा खां अमीर हसन आमिर रहे। जिन्होंने कई दर्द भरे और गमजदा नौहे पढ़े। कार्यक्रम में भारी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
शब्बेदारी की शुरुआत महताब हैदर ने कलाम पाक की तिलावत करके की। इसके बाद मर्सिया डाॅक्टर खुर्शीद अहमद और उनके सहयोगी ने पढ़ा। मजलिस को मौलाना शब्बीर अली वारसी ने हजरत इमाम हसन के कमसिन बेटे हजरत कासिम के फजायल विस्तार से बयान किए। हजरत कासिम की शहादत का जिक्र सुनकर सभी अकीदतमंद हाय कासिम की सदा बुलंद कर रो पड़े। मजलिस के बाद नौहा-मातम का सिलसिला शुरू हुआ। जिसमें मेजबान अंजुमन फिदा-ए-कासिम, मेहमान अंजुमन मासूमिया घोसी-मऊ, अंजुमन सज्जादिया मुफ्ती मोहल्ला जौनपुर, अंजुमन फरोग मातम, अंजुमन गुलदस्ता मातम ने नौहा-मातम करके हजरत कासिम अलैहिस्सलाम को नजराना-ए-अकीदत पेश किया।
मजलिस से पहले अलम और ताबूत का जुलूस इमाम बारगाह हुसैनिया अबु तालिब से निकाला गया। जो मातम के साथ इमाम बारगाह हुसैनिया अली हसन में पहुंचकर समाप्त हो गया। कार्यक्रम रात 10 बजे से शुरू होकर बृहस्पतिवार की सुबह 6:30 बजे समाप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन जाहिद कानपुरी और हैदर हल्लौरी ने किया। इस दौरान हसन अब्बास अरमान, अरशी रिजवी, अब्बास साहिल रिजवी, कैफी रिजवी, रियाज अहमद शानू, मंजर, मोहम्मद अब्बास, खुशहाल, कासिम रिजवी, कमबर, अली वजीर औन, शबीह हैदर, रजा, युसुफ आदि मौजूद रहे।