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पल्टा देवी शक्तिपीठ पर रहेगी दुर्गा पूजा की धूम

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शोहरतगढ़ क्षेत्र की शक्तिपीठ पल्टादेवी मंदिर परिसर में साफ-सफाई करते महंत घनश्याम गि​रि सहित अन - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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पल्टा देवी शक्तिपीठ पर रहेगी दुर्गा पूजा की धूम
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शोहरतगढ़। नवरात्रि के मद्देनजर शक्तिपीठ पल्टादेवी की साफ-सफाई की गई। मंदिर को सजाया गया। सोमवार से नौ दिन तक दुर्गा पूजा की धूम रहेगी। किंवदंती है कि पांडवों ने आदि शक्ति मां पल्टादेवी की स्थापना की थी। मां पल्टादेवी के दर्शन के लिए पड़ोसी देश नेपाल व दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं और मन्नतें मांगते हैं।
चिल्हिया क्षेत्र के जमुआर नदी के बगल स्थित मां पल्टादेवी का ऐतिहासिक मंदिर महाभारत कालीन है। मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर पांडवों ने अपना एक वर्ष का अज्ञातवास बिताया था। मंदिर के पास पुराना शमी का पेड़ है। पांडवों ने पहचान छिपाने के लिए अपने अस्त्र शस्त्र इसी पेड़ पर टांगकर विराट नगर में चाकरी की थी।
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यहीं से पांडवों का भाग्योदय शुरू हो गया। पांडवों के भाग्योदय के बाद से ही इस मंदिर का नाम पल्टादेवी पड़ गया और पल्टादेवी भाग्य की अधिष्ठात्री देवी के रूप में स्थापित हो गईं। वर्तमान में इस मंदिर को शक्ति पीठ का दर्जा मिला हुआ है। इस स्थान पर भगवान शिव तथा अन्य देवी देवताओं के मंदिर भी हैं। यह मंदिर लंबे समय से भक्तों की आस्था का प्रतीक है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए नवरात्र में पड़ोसी जनपद बलरामपुर, गोंडा, बस्ती, संतकबीरनगर और महराजगंज के अलावा पड़ोसी देश नेपाल के श्रद्धालु आते है। कहा जाता है कि इस मंदिर से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता।
मंदिर की विशेषता
यहां पर स्थित सरोवर में स्नान का अपना अलग ही महत्व है। दूर-दूर से लोग यहां बच्चों का मुंडन आदि कराने के लिए आते हैं। माना जाता है कि जिन बच्चों का मुंडन संस्कार यहां मां के दरबार में होता है, वे यशस्वी एवं दीर्घायु होने के साथ ही कुल का नाम रोशन करते हैं।
ऐसे पहुंचें मंदिर
सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय से बर्डपुर या शोहरतगढ़ के रास्ते यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। शोहरतगढ़ से यह शक्तिपीठ नौ किलोमीटर दक्षिण पूर्व दिशा में स्थित है। चिल्हिया रेलवे स्टेशन से भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां से मंदिर की दूरी आठ किलोमीटर है। सभी मार्गों पर आटो व अन्य छोटे निजी वाहन आसानी से मिल जाते हैं।
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वर्ष की दोनों नवरात्रि व आषाढ़ मास में यहां एक महीने का विशाल मेला लगता है। माता के दर्शनार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे कि किसी को कोई असुविधा न हो। दुकानदारों को गुणवत्तापूर्ण सामान उचित दर पर बेचने की हिदायत दी गई है। पर्यटन की दृष्टि से भी यह स्थान महत्वपूर्ण है। यदि सरकार इस ओर ध्यान दे तो परिसर का कायाकल्प हो सकता है। घनश्याम गिरी, महंत
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