कार्तिक पूर्णिमा पर बानगंगा, राप्ती नदी, बूढ़ी राप्ती ककरही घाट और डुमरियागंज के शाहपुर में श्रद्धालु लगाते हैं डुबकी
कार्तिक पूर्णिमा पर होने वाले हादसे से बचाव को लेकर नहीं है कोई तैयारी
बानगंगा में जनवरी में एक साथ डूब गए थे तीन युवक, फिर भी प्रशासन नहीं चेता
घाट पर कहीं नहीं लगा है निशान, आगे खतरा, सभी घाटों के पड़ताल में मिली अव्यवस्था
सिद्धार्थनगर। कार्तिक पूर्णिमा पर नदी में स्नान करने जाने की सोच रहे हैं तो सतर्क होकर डुबकी लगाएं। क्योंकि नदी के घाटों पर सुरक्षा और जागरूकता से संबंधित कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। कहां खतरा हो सकता और कहां डूब सकते हैं। कितने दूरी में स्नान कर सकते हैं, इससे जुड़ी कोई तैयारी नहीं हुई है। जबकि कार्तिक पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में लोग स्नान करते हैं। इसमें बच्चों के साथ ही अन्य उम्र के लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
पूर्व में डूबते-डूबते लोग बचे हैं। वहीं, बानगंगा नदी में मार्च में तीन बच्चे एक साथ डूब गए थे। फिर भी प्रशासन की ओर से कोई तैयारी नहीं की गई है। शनिवार को पड़ताल में स्नान करने और मेला लगने वाले बानगंगा, राप्ती नदी के विशुनपुर, बूढ़ी राप्ती ककरही घाट और डुमरियागंज के शाहरपुर राप्ती घाटों की यह तस्वीर सामने आई है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रशासन हादसे से भी सबक नहीं ले रहा है।
घाट नंबर एक
बानगंगउ घाट के कुंड से हादसों की आशंका
बानगंगा बैराज घाट पर कार्तिक पूर्णिमा को लेकर प्रशासन की तरफ से शनिवार को कोई तैयारी देखने को नहीं मिली है। नदी पर महिलाओं के कपड़े बदलने, बैरिकेटिंग, साफ-सफाई सहित आदि व्यवस्था नहीं पाई गई। यहां अवैध रेत के खनन के कारण नदी के तल में कई बड़े-बड़े गहरे कुंड बन गए हैं। इसके चलते स्नान करते समय यहां हादसों की आशंका बनी रहती है। इसी नदी में बीते होली के दिन स्नान करने आए तीन युवक की डूबने से मौत हो चुकी है।
एक महीना पहले दो महिलाएं आत्महत्या करने का प्रयास भी किया है। इन हादसों के बावजूद यहां कार्तिक पूर्णिमा को लेकर सुरक्षा के विशेष इंतजाम नहीं किए गए हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर सोमवार को गंगा स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बानगंगा बैराज नदी पर उमड़ेंगे। भोर से क्षेत्र ग्रामीण भारी संख्या में नदी में डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु पूजा अर्चना और दानपुण्य करेंगे। इसके बावजूद प्रशासन की तरफ से नदी के घाट कोई व्यवस्था की तैयारी शनिवार को नहीं देखने को मिली है। क्षेत्र के शंकर, रामू यादव, वीरेंद्र, रोहित ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा पर बानगंगा बैराज घाट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां नदी में डुबकी लगाते है।
घाट नंबर दो : भूतनाथ घाट
खतरे का निशान न जागरुकता का बोर्ड
बांसी तहसील क्षेत्र के बांसी पनघटिया बांध स्थित राप्ती नदी के भूतनाथ घाट मअउ बिशुनपुर मुस्तहकम गांव के उत्तर तरफ राप्ती नदी के पुल के पास पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर श्रद्धालु हजारों से ऊपर की संख्या में स्नान करते हैं। मगर प्रशासन की तरफ से घाट पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं की गई है। न तो बांस बल्ली लगाकर बैरिकेटिंग की गई है। नदी में पानी गहरा होने के कारण डूबने की आशंका बनी रहती है। उधर बांसी पंघटिया बांध स्थित राप्ती नदी के भूतनाथ घाट पर ऐतिहासिक मेले का आयोजन भी किया जाता है। जिसमें 50 गांवों से अधिक के लोग मेले का आनंद उठाने पहुंचते हैं।
घाट नंबर तीन
शाहपुर घाट पर नहीं है सुरक्षा का इंतजाम
डुमरियागंज नगर पंचायत के शाहपुर पुरानी बाजार में स्थित ठाकुर द्वारा के समीप हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मेले का आयोजन किया गया है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु राप्ती नदी में स्नान ध्यान कर के श्रधालु हर वर्ष की तरह इस बार भी मेले का आनंद लेकर घर जाएंगे। घाट पर साफ-सफाई और बैरिकेडिंग की तैयारियां लगभग पूरी कर चुकी हैं। सिर्फ नदी में खतरे को देखते हुए रस्सी नहीं लगाया गया है जो कल तक पूरी कर लिया जाएगा।
घाट नंबर चार
ककरही घाट पर भी नहीं है सुरक्षा का इंतजाम
जोगिया कोतवाली क्षेत्र के बूढ़ी राप्ती नदी के ककरही घाट पर हर वर्ष मेला लगता है। यहां 100 से अधिक गांव के लोग मेला देखने के लिए आते हैं। वहीं भोर में चार बजे से ही लोग नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन कई बार लोग डूबते-डूबते बचे हैं। लेकिन स्नान स्थल अभी तक चिन्हित नहीं किया गया है कि जहां लोग स्नान करें और डूबे नहीं।
होली में नहाते समय तीन दोस्तों की चली गई थी जान
बानगंगा बैराज नदी में स्नान करते हुए एक साथ तीन दोस्तों की जान बीते होली त्योहार के दिन हुई थी। आगे की गहराई के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इसलिए गहरे पानी में चले गए और डूबने से चिल्हिया थाना क्षेत्र के बड़गो निवासी अजीत सिंह (22) विक्की सिंह (20) सैनुआ कोतवाली लोटन हाल मुकाम भीमापार निवासी उज्ज्वल त्रिपाठी (19) पुत्र देवेश मणि त्रिपाठी की डूबकर मौत हो गई थी। इसके अलावा आत्महत्या करने के लिए लोग यहां से छलांग लगा चुके हैं।
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शाहपुर घाट पर जाने वाले रास्ते को जेसीबी से पाटकर बराबर कर दिया गया है। रास्ते को साफ-सफाई भी करा दिया गया है। घाट पर रेड निशान कल लगा दिया जाएगा, जिससे उससे आगे कोई श्रद्धालु नदी में ना जाए।
-महेश प्रताप श्रीवास्तव, ईओ डुमरियागंज
श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाएगा। घाटों पर किसी भी तरह का हादसा न हो, इसके लिए आवश्यक तैयारियों के लिए कार्तिक पूर्णिमा पर दुरुस्त करने के लिए निर्देशित किया गया है।
-अरुण कांत सिंह, सीओ