सिद्धार्थनगर। मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग में शनिवार को दो दिन में करीब 15 प्रसूताओं को रेफर कर दिया तो बेहोशी के डॉक्टराें की व्यवस्था की गई। सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा नहीं होने के कारण नार्मल डिलीवरी की संभावना वाले केस को रेफर किया गया, क्योंकि डॉक्टरों ने जोखिम नहीं उठाया, जबकि रूटीन सर्जरी वाले मरीजों को पहले ही वापस कर दिया गया था। ऐसी समस्या अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई है।
मेडिकल कॉलेज में बेहोशी के डॉ. विजय दुबे दो जुलाई तक अवकाश पर हैं, जबकि डॉ. एससी प्रसाद 30 जून को रिटायर हो गए। इस कारण दो दिन के लिए बेहोशी के एक डॉक्टर भी नहीं थे। इस कारण ओटी में 30 से अधिक सर्जरी टाल दी गई, जबकि शुक्रवार से ही प्रसव के लिए पहुंची गर्भवती महिलाओं को रेफर करना शुरू हो गया। जैसे ही परिजन को पता चला कि सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा नहीं है, तो वे अपने मरीज को लेकर कहीं और चले गए। सामान्य तौर पर 24 घंटे में 7-12 डिलीवरी होती है, जबकि शुक्रवार को चार महिलाओं की ही डिलीवरी हुई। शनिवार को पूरे दिन मात्र एक ही महिला की डिलीवरी कराई गई।
डॉक्टर भेजा, लेकिन पहुंचे नहीं
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एके झा के पत्र के आधार पर सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल ने शनिवार को बेहोशी के दो डॉक्टरों की तीन-तीन दिन के लिए मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी लगा दी, लेकिन कोई भी डॉक्टर नहीं पहुंचा। इस कारण इमरजेंसी सर्जरी भी नहीं हो पाई। सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल ने बताया कि शोहरतगढ़ में तैनात डॉ. सौरव चतुर्वेदी और मिठवल में तैनात डॉ. मेहताब आलम को तीन-तीन दिन मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी करने के लिए आदेश जारी किया गया है। प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर मिल जाएंगे तो इमरजेंसी के अलावा रूटीन भी प्रभावित नहीं होगी।