: प्रदूषित हुए जमुआर का पानी पड़ा काला, नहीं रहा उपयोग के लायक
: अधर में है जल निगम का जिले के 11 नगर निकायों में एसटीपी प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर की 40 हजार आबादी के निस्तार के 80 लाख लीटर पानी से जलस्रोत जहरीले हो रहे हैं। शहरी क्षेत्र के प्राकृतिक नाले जमुआर एवं पकड़ी सहित अन्य तालाबों के पानी का रंग बदल गया है। जिस पानी में पहले लोग नहाते धोते थे, उसी पानी में हाथ धोने वाले की त्वचा पर दाने निकल रहे हैं। अकेले प्राकृतिक जमुआर नाले में शहर के 15 हजार से अधिक घर की नालियों का पानी बहाया जा रहा है।
हालत यह है कि जमुआर नाले के गंदे पानी में हाथ अथवा पैर पड़ने के बाद तुरंत नहीं धुला गया तो त्वचा रोग से पीड़ित हो जाएंगे। वहीं शहरी जल निगम की तरफ से जिले के सभी 11 नगर निकायों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना भूमि नहीं मिलने से अधर में है।
शहर के लोगों के लिए निकट से गुजर रहे प्राकृतिक जमुआर नाले में ही सभी धार्मिक गतिविधियां संपन्न की जाती हैं। साथ ही लोगों के घर से निकलने वाला पानी नालियों से होते हुए इसी प्राकृतिक नाले में गिर रहा है। वर्तमान में इस नाले के तट पर छठ पूजा में हजारों लोग पूजा करते हैं। यहां तक कि शहर समेत आसपास के गांव के लोग भी इसी नाले के तट पर ही शव का दाह संस्कार करने के बाद स्नान करते हैं। सोमवार को परिजन का दाह संस्कार कर नाले के पानी में स्नान कर घर लौटे संतोष कुमार के पूरे शरीर में खुजली के साथ दाने निकल आए।
मंगलवार को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे संतोष का कहना था कि गंदगी के नाते नाले के पानी में स्नान करना नहीं चाह रहे थे, लेकिन धार्मिक परंपरा के चलते मजबूरी में स्नान किया तो पूरे शरीर में खुजली के साथ ही दाने निकल आए। शहर के पिठनी निवासी दीनानाथ कहते हैं कि पहले पशुओं को नाले का पानी पिलाने के साथ उन्हें स्नान भी कराते थे, लेकिन अब गंदगी देख पशुओं को वहां नहीं ले जाते हैं।
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24 घंटे में हर व्यक्ति खर्च करता है 200 लीटर पानी
शहर की 40 हजार आबादी के घर का पानी जमुआर नाले में गिर रहा है। इनमें प्रत्येक व्यक्ति स्नान, शौच, कपड़े व बर्तन धोने पर औसतन 200 लीटर पानी खर्च करता है, जो नालियों से होकर जमुआर में गिर रहा है। प्रतिदिन 3.60 लाख लीटर पानी के साथ स्नान करने वाले साबुन, शैंपू, सर्फ और बर्तन धोने के साबुन के केमिकल से जमुआर नाले का पानी प्रदूषित हो रहा है। इससे इसका पानी उपयोग के लायक नहीं रह गया है।
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पकड़ी प्राकृतिक नाला भी हो रहा प्रदूषित
शहर के ही कई मोहल्लों की नालियों का पानी पकड़ी प्राकृतिक नाले में गिरता है, जिससे इसका पानी भी उपयोग के लायक नहीं रह गया है। परसा महापात्र के पास से गुजर रहे इस प्राकृतिक नाले में भी शहर की आधी आबादी के घर का पानी गिराने की योजना पर कार्य चल रहा है, लेकिन यहां भी इस गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए एसटीपी लगाने की कोई योजना नहीं है। वर्तमान में इस प्राकृतिक नाले में परसा महापात्र, पकड़ी एवं आसपास के प्रतिष्ठानों का गंदा पानी गिराया जा रहा है।
जिले की सभी नदियों में गिर रहा गंदा पानी
नगर पंचायत उसका के पास से गुजर रही कूड़ा नदी में भी इस निकाय के कई मोहल्लों का गंदा पानी नालियों के माध्यम से गिराया जा रहा है। इसी तरह शोहरतगढ़ में बाणगंगा नदी और डुमरियागंज में राप्ती नदी में घर का पानी गिराकर इन प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषित किया जा रहा है। अन्य नगर निकायों बढ़नी, इटवा, बिस्कोहर, कपिलवस्तु, बढ़नीचाफा व भारतभारी के भी घरों का पानी नालियों के माध्यम से तालाबों, प्राकृतिक जलस्रोतों में गिराकर प्रदूषित किया जा रहा है।
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तीन वर्ष पहले बांसी नपा को मिला था नोटिस
बांसी। कस्बे का गंदा पानी नदी नालों के माध्यम से राप्ती नदी में गिराने के मामले में तीन वर्ष पूर्व एनजीटी ने नगर पालिका को जुर्माने की नोटिस दिया था। नोटिस मिलने के बाद नगर पालिका ने आनन-फानन में नदी में गिर रहे नाले को पक्का बनाकर कूड़ा करकट नदी में जाने से रोकने के लिए जाली लगा दी, लेकिन यहां अभी भी नदी में नालियों का पानी गिराने को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया गया है, जिससे शहर के गंदे पानी से राप्ती प्रदूषित हो रही है।
शहर की नालियों का पानी प्राकृतिक जमुआर नाले में गिरने से इसका जल प्रदूषित होकर काला पड़ गया है, बीमारी के भय से नाले के पानी के छूने से भी लोग परहेज करते हैं।
-कमलेश कुमार जायसवाल, शहरी
वर्षों से जमुआर नाला किनारे धार्मिक अनुष्ठान एवं अंतिम संस्कार होते रहे हैं, अब शहर की नालियों के गंदे पानी के प्रदूषण से लोग इस नाले के पास जाने से कतराने लगे हैं।
-मुन्नालाल कसौधन, बुजुर्ग शहरी
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कई शहरों में नालियों के पानी को शुद्ध करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं, यहां भी जमुआर नाले के पानी की शुद्धता बचाए रखने के लिए यह कार्य होना चाहिए।
-रामचंद्र गौड़, शहरी
पहले लोग इतना साबुन सर्फ व प्लास्टिक आदि गंदगी का प्रयोग नहीं करते थे, जिससे कम प्रदूषण होता था, अब इनका अधिक प्रयोग होने से प्रदूषण बढ़ गया है।
-मोहम्मद बसीर, बुजुर्ग शहरी
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के सभी नगर निकायों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजा गया है, जिसकी स्वीकृति मिलने के बाद कार्य करा दिया जाएगा।
-रेहान फारूखी, अधिशासी अभियंता जल निगम शहरी