नगर में शामिल मुडिला गांव में जल संकट, पानी के लिए परेशान है लोग
कई बार हैंडल चलाने के बाद निकल रहा नल से पानी नगर पालिका से भी नहीं हो पा रही आपूर्ति
गर्मी में पानी की संकट से जूझ रही है बड़ी आबादी
बिजली मोटर भी नहीं उठा पा रहा पानी परेशान है लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भीषण गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ गई है। शहर से मुडिला में बुंदेलखंड जैसी स्थिति नजर आ रही है। यहां पर अधिकांश हैंडपंप और देसी नल सूख चुके हैं। जो चल रहे हैं, वहां पानी के लिए चक्कर लगा रहे हैं। तकरीबन दस हजार की आबादी वाले शहर में शामिल इस गांव की जब पड़ताल की गई तो तस्वीर चौकाने वाली सामने आई।
लोग बताने लगे की हैंडपंप पिछले कई दिनों से पानी नहीं दे रहा था, अब तक बंद हो चुका है। शहर से सटे होने के बाद शहरी नहीं थे, लेकिन चार साल पहले शहर का दर्जा तो मिल गया। लेकिन पेयजल व्यवस्था का पर कोई काम नहीं हुआ। सप्लाई का पाइप तक नहीं है। हैंडपंप सूख चुके हैं। अब पीने के लिए जार का पानी खरीद रहे हैं। टैंकर तक नहीं भेजा जा रहा है। स्थिति दयनीय है, लेकिन जिम्मेदार बेखबर हैं।
गर्मी में जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। इससे हैंडपंप में पानी कम आ रहा है। कमोबेश यह समस्या हर जगह देखने को मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्र में तो लोग किसी तरह व्यवस्था कर ले रहे हैं। लेकिन शहर में विकल्प के तौर पर कुछ नहीं है, जहां से पानी की पूर्ति की जा सके। नगर के सटे होने के बाद भी मुडिला गांव में था। चार साल पहले सीमा विस्तार में शहर का हिस्सा बन गया। पर शहर की तर्ज पर 10 हजार से अधिक आबादी वाले इस वार्ड को सुविधा नहीं मिली। पेयजल, सड़क और नाली अहम सुविधाओं में होती है, जिसमें एक भी दुरुस्त नहीं है। गर्मी बढ़ने के बाद मुडिला में पानी का संकट पिछले कई दिनों से खड़ा हो गया। हैंडपंप सूखे चुके हैं, एकाध जो चल हैं। वह भी कई बार हैंडिल मारने के बाद पानी निकल रहा है। कहेंं तो बुंदेलखंड जैसा यहां के लोगों को एहसास हो रहा है। जल समस्या की हकीकत जानने के लिए मुडिला के उन कई स्थानों पर पहुंचे जहां पानी का संकट है। हैंडपंप सूख चुके हैं। प्यास बुझाने के लिए जार बेचने वाले का रास्ता लोग निहार रहे हैं। वार्ड के रामहित ने कहा कि एक पखवारा से पानी की किल्लत है। अब तक नल ही सूख गया। 80 फीट वाला है, एक बूंद पानी नहीं आ रहा है। 30 रुपये जार खरीदकर प्यास तो बुझा ले रहे हैं। लेकिन नहाने और कपड़ा धुलने के लिए पानी की दिक्कत हो रही है।
फरजाना ने कहा कि हैंडपंप पानी देना बंद किया तो लगा कि खराब हो गया। दूसरा पाइप डलवा दिए फिर भी समस्या बनी हुई है। वहीं, रेशमा ने कहा कि मोटर से भी पानी नहीं निकल रहा है। जहां पानी निकलता है कई बार जाना पड़ता है। धूप में दूर से पानी लाना बड़ा मुश्किल का काम है, लेकिन करें क्या कोई सुनने वाला नहीं है।
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चार गाड़ी पानी हो रही खपत
लोगों के मुताबिक दिन में चार बार पानी बेचने वाली गाड़ी आ रही है, तब जाकर लोगों को पीने के भर का पानी मिल पा रहा है। 30 रुपये जार के हिसाब से पानी खरीदकर पी रहे हैं। जबकि, पहले कुछ ही लोग पानी खरीदते थे। लेकिन हैंडपंप सूखने के बाद से पीने के पानी की मांग बढ़ गई। कई हजार रुपये का प्रतिदिन पानी बिक जा रहा है।
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पानी की किल्लत गर्मी बढ़ने के बाद से ही बढ़ गई है। अब तक हैंडपंप और देसी नल भी सूख गए हैं। एकाध में पानी आ रहा है तो बहुत कम। जिससे पूर्ति नहीं हो रही है। नगर पालिका की ओर से टैंक भी नहीं भेजा जा रहा है।
नंदराम यादव, मुडिला
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सब लोग जान रहे हैं कि अधिकांश हैंडपंप सूख गए है। सरकारी हैंडपंप पहले ही खराब पड़े हैं। नगर में शामिल होने के बाद भी वॉटर सप्लाई की व्यवस्था नहीं हुई। अगर यही हाल रहा तो आने वाला समय और कठिन हो जाएगा।
भारत भूषण, मुडिला
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पानी की समस्या को लेकर दो बार प्रस्ताव दिया गया है कि ओवर हेड टैंक से जलापूर्ति की जाए। पानी की किल्लत को देखते हुए टैंकर भेजने के लिए भी अवगत करा दिया गया है।
-ज्ञानती देवी, वार्ड सभासद
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पानी की समस्या के बारे में जानकारी नहीं है। पता करवाते हैं और जल्द ही व्यवस्था की जाएगी। स्थायी रूप से दिक्कत दूर करने के लिए जल निगम से वार्ता करके व्यवस्था की जाएगी।
-विंध्याचल, ईओ नगर पालिका सिद्धार्थनगर