बघौचघाट। घर की जरूरत को पूरा करने के लिए माइक्रो फाइनेंस कंपनियां बिना किसी तामझाम के सस्ते दर पर लोन तो उपलब्ध करा दे रही हैं, लेकिन इस बाद जो साप्ताहिक ब्याज की वसूली शुरू हो रही है, उससे व्यक्ति कर्ज के जाल में उलझ जा रहा है। पकहां गांव के विकास की कहानी भी इससे अलग नहीं है। एक-एक करके पांच कंपनियों से दो लाख कर्ज ले लिया, जिन्हें चुकता करने के बाद भी वह ढाई लाख का कर्जदार हो गया था। अब जब हर दिन एजेंट दरवाजे पर आकर धमकी देने लगे, तब उसे इस जाल से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझा और अंतत: उसने मौत का रास्ता चुन लिया। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद विकास का अंतिम संस्कार किया गया। पकहा गांव का विकास पटेल मजदूरी करके घर चल रहा था। गांव वालों ने बताया कि करीब पांच साल पहले एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट ने विकास को बिना ब्याज और बिना किसी कागजी कोरमपूर्ति के केवल आधार कार्ड दिखाकर कर्ज दिलाने का झांसा दिया। घर की जरूरत के लिए विकास ने कर्ज ले लिया। जल्द ही वह पैसा खर्च हो गया। उधर महीने भर बाद ही एजेंट लोन की किस्त जमा करने के लिए आने लगा।