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Siddharthnagar News: दो साल लगाया चक्कर...अब मिलेगा मुआवजा

Sat, 13 Apr 2024 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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- फसल क्षति का बीमा करने वाले 3789 किसान थे मुआवजा से वंचित
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-क्रॉप कटिंग के सर्वे में सामने आई नुकसान की रिपोर्ट

- दो साल बाद किसानों को 13 करोड़ मुआवजा देगी बीमा कंपनी

- खातों में धनराशि भेजने की प्रक्रिया शुरू

- मुआवजा के लिए किसान थे परेशान कई बार शिकायत भी किए थे किसान

- फसल क्षति की रिपोर्टिंग और कागज में गड़बड़ी होने से अटक गई थी धनराशि

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। बाढ़ में फसल खोकर बीमा कराने के बाद मुआवजा के लिए दो साल से चक्कर लगा रहे किसानों के लिए अच्छी खबर है। फसल बीमा वाले 3789 किसानों को जल्द ही मुआवजा राशि मिलेगी। लगभग 13 करोड़ रुपये इन किसानों को बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा राशि के रूप में भुगतान किया जाएगा। किसानों को धनराशि भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। फसल क्षति की रिर्पोटिंग में गड़बड़ी और कागज पूरा न होने के कारण किसान मुआवजा से वंचित थे। अब रुपये मिले से किसानों को काफी राहत मिलेगी।

किसानों को फसल क्षति का लाभ मिले, इसके लिए प्रधानमंत्री फसल योजना के तहत किसानों की फसल का बीमा होता है। इसमें सरकार की ओर से नामित बीमा कंपनी की ओर से किसानों का रबी और खरीफ फसल की बीमा होता है। इसमें अधिकांश किसानों का बैंक के केसीसी से ही बीमा राशि जमा हो जाती है। जबकि कुछ किसान खुद बीमा करवाते हैं। जिले में बाढ़ और ओलावृष्टि से फसलों को बहुत नुकसान होता है। इसलिए किसान बीमा करवाते हैं। लेकिन कागजी सर्वे में गड़बड़ी का खामियाजा किसान भुगते हैं। जैसा की वर्ष 2022 में आई बाढ़ में किसानों का बहुत नुकसान हुआ था। इसमें रिपोर्टिंग में गड़बड़ी और कागजी कमी के कारण 3789 किसान मुआवजा राशि से वंचित हो गए थे। धनराशि आने के बाद भी किसानों खाता नंबर और फीडिंग में गड़बड़ी होने के कारण नहीं मिला था। किसान पिछले दो साल से चक्कर काट रहे थे। सारा डाटा सही हुआ। अब इन किसानों को लगभग 13 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजा राशि भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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यहां से हुई थी गड़बड़ी
विभाग से जुड़े लोगों की माने तो फसल क्षति का सर्वे तीन विभाग कृषि, राजस्व और बीमा कंपनी करती है। कहीं समय से सर्वे नहीं हुआ। कहीं दोनों लोगों की रिपोर्ट में अंतर तो कहीं नाम, बैंक खाते की केवाईसी, आधार और नंबर बेमेल था और ध्यान नहीं दिया गया। इसी वजह से किसान वंचित रह गए थे। इसलिए मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हो पा रहा था।



वापस कराई गई धनराशि

बीमा की राशि खातों में गड़बड़ी सहित अन्य खामियों की वजह से जब खाते में रुपये का भुगतान एक साल तक नहीं हुआ तो धनराशि भारत सरकार के खाते में वापस चली गई थी। इसके बाद खातों को सही करके पहल हुआ फिर धनराशि वापस आई। अब किसानों में वह राशि वितरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।



हर साल सरकार तय करती है फसल की बीमा राशि

फसल से बीमा से जुड़े लोगों के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को उनकी फसलों के नुकसान का शत-प्रतिशत क्षतिपूर्ति बीमा कंपनी वापस करती है। इसके लिए किसानों को आपदा के 24 से 48 घंटे के भीतर जरी टोलफ्री नंबर पर सूचना देना होता है। साथ ही निर्धारित प्रीमियम किसान को संबंधित फसल बीमा कंपनी को जमा करना होता है। इसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा करने वाली कंपनी हर वर्ष रबी व खरीफ की फसलों का बीमा के लिए प्रीमियम निर्धारित करती है।
वर्ष 2022 में खरीफ की फसल के लिए सरकार की ओर से नामित यूनिवर्सल बीमा कंपनी ने 1465 रुपए प्रति हेक्टेयर का प्रीमियम जमा करा कराया। धान की फसल नष्ट होने पर 82 हजार प्रति हेक्टेयर की दर से किसानों को क्षतिपूर्ति दी जा रही है। वहीं 2023 में खरीफ के फसलों के लिए 1726 रुपये प्रति हेक्टेयर का प्रीमियम निर्धारित था। जिसमें फसल नष्ट होने पर किसानों को 86 हजार प्रति हेक्टेयर के दर से मुआवजा राशि किसानों को दिया गया। इसी तरह रबी के फसलों के लिए वर्ष 2023 में 1305 रुपये प्रति हेक्टेयर के प्रीमियम पर 83 हजार रुपये किसानों को दिया जा रहा है। इस वर्ष खरीफ की फसलों के लिए अभी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम निर्धारित नहीं किया गया है। इसका निर्धारण भारत सरकार करती है, जो मई के अंतिम सप्ताह या जून में होने की संभावना है।



वर्ष 2022 मे खरीफ की फसल का बीमा कराया था। अक्तूबर में आई बाढ़ में धान की फसल नष्ट हो गई। बैंक व तहसील का चक्कर काटते थक गया था। एक बार बीमा एजेंट से मिला तो उन्होंने कहा कि कुछ कागज में कमी होगी। आठ अप्रैल को प्रधानमंत्री फसल बीमा के पैसा का मैसेज मोबाइल पर आया तो खुशी का ठिकाना नहीं। अब हर वर्ष अपने फसलों की सुरक्षा के लिए फसल बीमा जरूर कराएगें।

-महफूजुर्रहमान, निवासी असनहरा माफी



वर्ष 2022 में आई बाढ़ में धान की फसल नष्ट हो गई थी। जिसका प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया था, लेकिन बीमा का पैसा नहीं मिला। खूब चक्कर लगया। अंत में थक हारकर बैठ गया। दो दिन पहले ही फसल बीमा का 1.68 लाख रुपये खाते में आ गया। अब आगे इस पैसे को खेती व बच्चों के पढ़ाई में सहूलियत मिलेगी।
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-बलराम पांडेय, अदुआ शनिचरा

वर्ष 2022 खरीफ फसल क्षति वाले किसानों जो प्रधानमंत्री फसल बीमा करवाए थे, उनके मुआवजा राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही सभी किसानों को मुआवजा मिल जाएगा।
-मुहम्मद मुजम्मिल, जिला कृषि अधिकारी
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