मेडिकल कॉलेज के पैथालोजी में ब्लड जांच करने के लिए सैंपल लेते स्वास्थ्य कर्मी।
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के सेंट्रल लैब में 12 दिन से थायराइड की जांच नहीं हो रही है। इस कारण मरीजों को निजी पैथोलॉजी में जांच कराने की मजबूरी है। इस जांच के लिए शुल्क निर्धारित किया गया है, इसके बावजूद भी रिएजेंट के अभाव में जांच थम गई है।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर दिन करीब 12 सौ मरीज पहुंच रहे हैं। स्त्री व प्रसुति रोग विभाग सहित अन्य विभागों के डॉक्टर थायराइड की जांच लिखते हैं तो मरीजों को निजी पैथोलॉजी में जेब ढीली करनी पड़ती है। सरकारी अस्पताल में थायराइड जांच का शुल्क 300 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि निजी अस्पतालों में करीब 600 रुपये यह जांच हो रही है। सरकारी अस्पताल की पैथोलॉजी में लाइन लगाकर सैंपल जमा करने वाले मरीजों को निजी पैथोलॉजी में जाने की नौबत आ रही है। सबसे अधिक समस्या गर्भवती महिलाओं को हो रही है।
थायराइड जांच के लिए शुल्क अधिक देना पड़ा, जबकि परेशानी भी हुई। एक सप्ताह पहले आई थी ,इतना समय बीतने के बाद आई तो भी जांच नहीं हो सकी।
-रुकमणी
पैथोलॉजी में लाइन लगाकर सैंपल दिया तो पता चला कि थायराइड की जांच नहीं हो रही है। जिस जांच का शुल्क जमा हा रहा है, उसका रिएजेंट नहीं समाप्त होना चाहिए।
-रामबेलास
थाइराड जांच के रिएजेंट के लिए आर्डर दिया गया है। निर्धारित कंपनी की ओर से रिएजेंट की आपूर्ति करने में देर की गई है। जल्द ही जांच शुरू कराई जाएगी।
-डॉ. एके झा, प्राचार्य