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Siddharthnagar News: साक्ष्य के अभाव में तीन हत्यारोपी अभियुक्त दोषमुक्त

Sun, 30 Jul 2023 11:02 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार ने हत्या के आरोपी तीन अभियुक्तों को प्रत्यक्ष साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर जेल से रिहा कर दिया है। घटना थाना डुमरियागंज की है जो 10 वर्ष पहले घटी थी।
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बिहार निवासी उमरावती ने 24 जुलाई 2013 को डुमरियागंज पुलिस को दिए तहरीर बताया कि वह बिहार के ग्राम धवनहा थाना धनहा, जिला पश्चिमी चंपारण की है। वह चार महीने से अपने पति छट्ठू व माता आरती पत्नी माया यादव के साथ डुमरियागंज थानाक्षेत्र के ग्राम जबजौआ, में आकर मजदूरी कर रही है। वह गांव में कल्लू के मकान में किराये पर रहते थे। 10 जुलाई 2013 को समय तीन बजे दिन में चांद मोहम्मद उर्फ जमाल निवासी ग्राम अल्लापुर व नौशाद ग्राम धनखरपुर उसके पति छट्टू को टैंपो में बैठाकर ले गये। उसके थोड़ी देर बाद रूव्वाब उर्फ संजू व उसका छोटा भाई संगुल उर्फ तव्वाब ग्राम बसडिलिया बाइक से आये और उससे कहे कि तुम्हारे पति छट्टू की मौत मेरे हाथों लिखी है, आज उसकी हत्या कर दूंगा और चले गये। उसके बाद से मेरे पति घर पर नहीं आये। वह खोजते हुये संजू और संगुल के घर आयी तो वे लोग बताये कि अब तुम्हारा पति नहीं आयेगा। इसके बाद वह नौशाद व जमाल के घर गयी तो वे लोग भी कहे कि अब वह नहीं आएगा, तब से वह और उसकी मां पति की खोज कर रहे है।
आज डुमरियागंज कस्बे में कुछ लोगों ने बताया कि 11 जुलाई 2013 को मालीमैनहा बंधे पर एक लावारिस लाश मिली थी, जिसका पंचनामा व पोस्टमार्टम पुलिस ने कराया था, जिस पर मैं थाने पर आयी और फोटो देखकर अपने पति को पहचाना कि ये मेरे पति हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि मेरे पति की हत्या उपरोक्त चारो लोगों ने ही मिलकर किया है। पुलिस ने चारों के विरूद्ध केस दर्ज कर विवेचना किया और विवेचना के बाद हत्या कर सबूत मिटाने के अपराध में न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेकर विचारण प्रारंभ किया, उसी दौरान अभियुक्त चांद मोहम्मद की पत्रावली अलग करके शेष तीन मुल्जिमों का विचरण एक साथ किया और विचारण की समाप्ति के बाद विचारण के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, जिरह, पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य आवश्यक प्रपत्रों का सम्यक परिशीलन करते हुए निष्कर्ष निकाला कि मामला संपूर्ण रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है जिसे अभियोजन पक्ष कड़ी से कड़ी जोड़कर संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। न्यायालय ने उक्त तीनों मुल्जिमों नौशाद, संजू उर्फ रूव्वाब एवं संगुल उर्फ तव्वाब को संदेह का लाभ देते दोषमुक्त करार देकर जेल से रिहा कर दिया।
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विवेचक पर कार्रवाई को मुख्य सचिव को भेजा निर्णय की प्रति
कोर्ट ने कहा मामले में विवेचक द्वारा विवेचना के दौरान की गयी त्रुटियां, उसकी घोर उपेक्षा एवं अकर्मण्यता को दर्शित करती हैं। हत्या जैसे गंभीर मामले में विवेचक द्वारा की गयी कमियों एवं उसके कृत्य के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों के अधीन गठित कमेटी के समक्ष सबंधित विवेचक के विरुद्ध समस्त तथ्यों से अवगत होकर आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा जाना उचित है। इसलिए निर्णय की प्रति जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन को भेजी जाये, जिससे कमेटी विवेचक के विरुद्ध कार्रवाई कर सके।
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