सिद्धार्थनगर। परिवहन निगम की बसों को डिपो से आगे बढ़ने और यात्रा पूरी होने का समय निर्धारित नहीं होने के कारण यात्रियों का भरोसा कम हो रहा है। शहर में नियमित यात्रा करने वाले लोग निजी बसों से आना जाना पसंद कर रहे हैं, क्योंकि निजी बसों की समयबद्धता निगम की अपेक्षा अच्छी है। यहीं कारण है कि रोडवेज बसों में यात्रियों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है और कई रूटों पर घाटा हो रहा है।
यात्रियों के अनुसार परिवहन निगम की बसों में यात्रा अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन निगम की बसों में समयबद्धता का अभाव है। जब यात्रा करनी होती है तो लोग पहले डिपो में जाकर बस की तलाश करते हैं, लेकिन नियमित रूप से बस में सफर करने वाले लोगों का निगम की सेवा से मोहभंग हो रहा है।
सिद्धार्थनगर डिपो में गोरखपुर के लिए आठ और लखनऊ के लिए 10 बसें चलाई जा रही है। डिपो में इन बसों में सीट भर जाती है तो पहिया आगे बढ़ती है। वहीं निजी बसों में समय निर्धारित है, जिस बस के जाने का समय होता है तो वह रवाना हो जाती है। जब बस समय से खुलती है तो समय पर पहुंच भी जाती है। यह सुविधा यात्रियों का पसंद आ रही है।
यात्रियों की बात
सिद्धार्थनगर की बस डिपो में बसों के आने-जाने का समय निर्धारित नहीं है। बसों की सूची चस्पा नहीं है इसलिए यात्रियों को सभी बसों के बारे में जानकारी नहीं हो पाती है। कई बार डिपो में जाकर पछतावा होता है।
गोपाल गुप्ता
निजी बसों के आने-जाने का समय निर्धारित है। गोरखपुर हो या सिद्धार्थनगर डिपो, आसानी से पता ही नहीं चलता है कि बस कब आएगी और कब खुलेगी। जब तक पूरी सीट पर यात्री नहीं बैठ जाते हैं, तब तक बस आगे नहीं बढ़ती।
अरमान खान
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वर्जन
सिद्धार्थनगर बस डिपो से अधिकतर बस निर्धारित समय पर खुलती हैं। जब ज्यादा सीटें खाली रहती है तो कुछ समय इंतजार करना पड़ता है। इस समय रोडवेज बस में लोड फैक्टर 60 प्रतिशत से अधिक है।