सिद्धार्थनगर। बांसी क्षेत्र के मेेचुका गांव के किसान राप्ती नदी की कटान से भूमिहीन होने के कगार पर हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग कटान रोकने का कोई सफल प्रयास नहीं कर रहा है। राप्ती नदी के उत्तरी-पश्चिमी छोर पर बांसी-डुमरियागंज बांध के निकट बसे मेचुका गांव के किसानों का लगभग तीन सौ बीघा खेत नदी में विलीन हो चुका है। एक दशक से नदी में विलीन हो रहे खेत को बचाने के लिए किसान अनवरत गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कारगर पहल नहीं हुई। ऐसा ही हाल गदुरहिया व तेलौरा गांव के किसानों का भी है। यहां भी खेत कटकर नदी में विलीन हो रहे हैं।
राप्ती नदी के तट पर मेचुका मोड़ के पास कई वर्षो से कटान जारी है। इस कटान के चलते नदी दिशा बदल रही है और किसानों का खेत कट रहा है। गांव के बेचन सिंह, वीरेंद्र सिंह, अशोक सिंह, शिवकुमार, संजय सिंह, मंगल सिंह, भोला सिंह, रमेश कुमार, योगेन्द्र सिंह, चंद्रभान सिंह, शेषराज सिंह, लक्ष्मण सिंह, राम इकबाल सिंह, टिल्लू सिंह, प्रदीप सिंह, छोटे सिंह, राजेश सिंह, मुन्ना सिंह, सूरज सिंह, राधेश्याम सिंह, राजेश सिंह, शेर बहादुर सिंह, गदुरहिया गांव के राम कला, झिनक, दाहू तेलौरा गांव के पूर्णमासी का खेत नदी में विलीन हो चुका है। कृषक वीरेंद्र सिंह का कहना है कि कई वर्षों से खेत नदी में विलीन हो रहे हैं। कटान को रोकने के लिए कई बार विभागीय अभियंताओं से मांग की गई। परंतु किसी ने ध्यान नहीं दिया। उसका परिणाम है कि लगातार कटान जारी है। हर वर्ष बाढ़ में खेत कटकर नदी में विलीन हो रहे हैं। कृषक हरीश सिंह का कहना है है कि इसी तरह कटान जारी रही तो किसान भूमिहीन हो जाएंगे। इनका कहना है कि किसानों की मांग पर सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए कुछ काम किया है, इसके बावजूद कटान जारी है। उन्होंने विभाग से कटान रोकने का स्थायी इंतजाम किए जाने की मांग की है। भोला सिंह का कहना है कि सिंचाई विभाग की लापरवाही से कृषकों का नुकसान हो रहा है। यदि विभाग ने किसानों की पीड़ा को समझा होता तो इतनी अधिक कटान नहीं होती। ग्राम प्रधान सुजीत सिंह का कहना है कि उनके परिवार व गांव के कई लोगों का खेत नदी में समा चुका है। यदि इसी रफ्तार से कटान जारी रही तो बड़ी संख्या में किसान भूमिहीन हो जाएंगे।
राप्ती की कटान से दहशत में किसान
सिद्धार्थनगर। इटवा व डुमरियागंज तहसील क्षेत्र से होकर बहने वाली राप्ती का जलस्तर बढ़ रहा है। लोग राप्ती के बढ़ते जलस्तर व तेज कटान से दहशत में हैं। राप्ती नदी इटवा तहसील क्षेत्र के गागापुर, आजाद नगर व विशुनपुर औरंगाबाद गांव के करीब सट कर बह रही हैं। गागापुर गांव के पास से होकर जाने वाले शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग पर भी खतरा मंडरा रहा है। आजाद नगर गांव के चंदू प्रजापति, ननकऊ, लाला, जाबिद, राम नरेश यादव, वसीम खान ने बताया कि उनके घर के पास से राप्ती नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अभी नदी के भीतर होने से गांव की तरफ कटान तेज हो रही है। इससे कई घरों पर खतरा मंडरा रहा है। यहां बचाव का इंतजाम नाकाफी है।