प्रतिवर्ष सैकड़ों युवा जिले से बाहर इंजीनियरिंग करने के लिए जाते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शिक्षा के क्षेत्र में भले ही ये जिला हब बनता जा रहा हो, लेकिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए छात्रों को दूसरे जिलों व दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है। इससे अभिभावकों पर आर्थिक भार पड़ रहा है। साथ ही छात्र भी अभिभावकों से दूर हो रहे हैं। जिले में हर साल कक्षा 12 से लगभग 25 हजार छात्र-छात्राएं पास करते हैं। लेकिन विज्ञान संकाय से लगभग 10 हजार छात्र पासआउट होते हैं। इनमें से 30 फीसदी छात्र ऐसे हैं, जो इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं।
छात्र को तो इंजीनियरिंग समेत अन्य की पढ़ाई के लिए दूसरे जगहों पर जाने के लिए अभिभावकों की सहमति मिल जाती है, लेकिन छात्राओं के मामले में अधिकांश अभिभावक बाहर भेजने से कतराते है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में छात्राएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
मेडिकल की तरह सरकार इंजीनियरिंग कॉलेज खोले तो जिले की लगभग 32 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को मजबूरन बाहर जाना पड़ रहा है। जबकि जिले में एक मेडिकल कॉलेज मौजूद हैं, लेकिन अब छात्रों को इंजीनियरिंग कॉलेज का इंतजार हैं। अगर राज्य सरकार इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना करे तो हर साल हजारों छात्रों को लाभ मिल सकेगा।
यहां इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं को मजबूरन अन्य विषयों की पढ़ाई करनी पड़ती है। इंजीनियरिंग कॉलेज खुलना चाहिए।
ममता सोनी, छात्रा
अगर सरकार यहां इंजीनियरिंग कॉलेज खोलेगी तो निश्चित हजारों छात्रों को लाभ मिलेगा। सामान्य परिवारों के छात्र भी इंजीनियर बन सकेंगे। बाहर की भाग-दौड़ बंद हो जाएगी।
सर्वेश्वर दुबे, छात्र
हजारों छात्र प्रतिवर्ष विज्ञान वर्ग से करते हैं 12वीं
जिले में प्रतिवर्ष हजारों छात्र-छात्राएं कक्षा 12वीं में विज्ञान वर्ग की पढ़ाई करती हैं। इंजीनियरिंग के विकल्प न होने के कारण उन्हें मजबूरन आगे की पढ़ाई के लिए विषय बदलना पड़ता है। क्योंकि जिले में कला, साइंस, कॉमर्स, उर्दू व संस्कृत विषय संचालित हैं। इन्ही विषयों में ही स्नातक की पढ़ाई करते हैं।