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Siddharthnagar News: नहीं हैं सर्जिकल सामान, चिमटी के सहारे लगाते हैं टांका

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नहीं हैं सर्जिकल सामान, चिमटी के सहारे लगाते हैं टांका
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में अव्यवस्था हावी है। अस्पताल की इमरजेंसी सेवा में सर्जिकल सामान की कमी है। न कैंची है और ना ही अन्य सामान। घायलों को टांका लगाने और धागा पकड़ने के लिए महज एक चिमटी की ही व्यवस्था है। घायलों का त्वरित इलाज किसी प्रकार होता है। सुविधाएं मुहैया कराने वाले इससे बेखबर हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में जिले के सभी क्षेत्र के मरीज आते हैं। इसमें हादसे के शिकार मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद इस लिए रेफर कर दिया जाता है कि उनका बेहतर इलाज हो सकेगा। यहां पर त्वरित इलाज की ही व्यवस्था नहीं है। कारण, जिला अस्पताल में घायलावस्था में आने वाले लोगों के शरीर में अगर अधिक जख्म होता है तो टांका लगाने की नौबत आती है। स्थिति यह है कि इमरजेंसी में सर्जिकल का सामान ना के बराबर है। इमरजेंसी ड्यूटी करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार, अस्पताल में घायलों को टांका लगाने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। न कैंची की व्यवस्था है और न ही अन्य कई सामान। केवल चिमटी है, जिसके सहारे टांका लगाते समय धागे को पकड़ा जाता है। अगर धागे को काटना हो तो अलग से ब्लेड रखना पड़ता है। इस संबंध में डॉ. एके झा ने बताया कि जब इमरजेंसी से मांग होगी, तभी सामान मुहैया कराया जाएगा। ड्यूटी पर तैनात फार्मासिस्ट को सामान की मांग करनी चाहिए। सामान की आपूर्ति की जाएगी।
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हर दिन आते हैं चार से 10 हादसे के शिकार लोग
अस्पताल में इमरजेंसी सेवा के लिए आंकड़ों पर गौर करें तो यहां प्रतिदिन चार से 10 लोग हादसे का शिकार होकर पहुंचते हैं। कभी- कभी इनकी संख्या बढ़ भी जाती है। ऐसे में एक साथ कई मरीजों को टांके लगाने की जरूरत पड़ जाती है। सामान न होने के कारण इलाज करने में देरी हो जाती है, जो मरीजों के लिए घातक भी साबित हो सकती है। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक साथ कई घायल मरीजों के पहुंचने के बाद तत्काल इलाज न होने पाने कारण विवाद की स्थिति बन जाती है।
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