सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की लचर व्यवस्था के कारण दलालों को प्रश्रय मिल रहा है। मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे एक साल से खराब हैं। इस कारण दलालों की हरकतें कैमरे में कैद नहीं हो पा रही हैं, जबकि चोरी व अन्य विवादों में भी साक्ष्य नहीं मिल पा रहे हैं। इसका फायदा उठाकर आरोपी कार्रवाई से बच जा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर दिन 800 से 1200 मरीज पहुंच रहे हैं। ये मरीज एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड व पैथोलॉजी में जांच कराते हैं, जबकि ब्लड बैंक में खून का आदान-प्रदान करने जाते हैं। इन स्थानों पर लगाए गए कैमरे एक साल से खराब बताए जा रहे हैं, इस कारण मरीजों को बहकाने वाले दलालों को चिह्नित करना कठिन हो गया है। डॉक्टरों के अनुसार सीसीटीवी कैमरे में तस्वीर आती तो अस्पताल में लगातार दिखने वाले गैर विभागीय कर्मियों से पूछताछ करने में आसानी होती और इनका प्रवेश प्रतिबंधित करना आसान होता।
मेडिकल कॉलेज में एनएमसी के कैमरे लगे हैं, जिसमें रिकॉर्डिंग नहीं होती है। इसके पहले एमसीएच विंग में 26, पीआईसीयू में तीन, आईसीयू में तीन, इमरजेंसी में दो और ओपीडी में दो कैमरे लगे थे, लेकिन इनमें तकनीकी खराबी बताई जा रही है। इन कैमरों से भी पूरे अस्पताल की तस्वीर नहीं आ रही थी, क्योंकि एनआरसी, सर्जिकल वार्ड, मेडिसिन वार्ड, ओपीडी के सामने पार्किंग स्थल पर कैमरे नहीं लगे थे।
इन मामलों में बच निकले आरोपी
- पीआईसीयू में रात में दो लोग पहुंचे और विवाद हुआ। स्टाफ नर्सों ने आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्रता की गई, उन्होंने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। केस दर्ज हुआ लेकिन विवाद का साक्ष्य नहीं मिला।
- इमरजेंसी में रात में एक आउटसोर्स कर्मी ने मरीज को बाहर ले जाने के मामले में हुए विवाद में डॉक्टर को धमकाया। प्राचार्य ने डीएम एवं आउट सोर्स एजेंसी को पत्र लिखा लेकिन साक्ष्य नहीं मिलने से कार्रवाई में बयान ही आधार बना।
-पीआईसीयू में स्टॉफ नर्स को मोबाइल चाेरी हो गया और मिला नहीं। एमसीएच विंग के सामने से एक स्वास्थ्य कर्मी की साइकिल चोरी हो गई थी।
- ओपीडी के सामने से एक बाइक चोरी हुई थी, जबकि बाइक में रखे गए रुपये गायब होने का मामला भी आया था, लेकिन चोर की पहचान करने में कैमरे की मदद नहीं मिली।
पुराने सीसीटीवी कैमरों की हार्डडिस्क खराब हो गईं हैं। उन्हें मरम्मत कराने को भेजा गया है। नए कैमरे लगाने की कोशिश की जा रही है।
- डॉ. एके झा, प्राचार्य