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आम लोगों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए एसपी को हटाने की मांग पर विधायक दे रहे धरना
पीड़ित के मुकरने के बाद भी डटे हैं विधायक, कहा-एसपी के हटने तक जारी रहेगा धरना
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एसपी को हटाने की मांग को लेकर शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा का धरना बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। नगर पालिका कार्यालय के सामने गांधी प्रतिमा के पास बने धरना स्थल पर विधायक पूरी रात समर्थकों संग डटे रहे। उन्होंने एसपी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक उन्हें हटाया नहीं जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि दो उच्चाधिकारियों से वार्ता हुई, जिन्होंने जल्द ही कार्रवाई का आश्वासन दिया है। दूसरी तरफ पीड़ित परिवार जिसके लिए विधायक धरने पर बैठे हैं उन्होंने विधायक पर ही राजनीति करने का आरोप लगा दिया है।
केंद्र और राज्य सरकार में भाजपा के सहयोगी अपना दल (एस) के शोहरतगढ़ से विधायक विनय वर्मा का आरोप है कि एसपी प्राची सिंह और उनके मातहत जन विरोधी कार्य कर रहे हैं। इसलिए उन्हें विवश होकर धरने पर बैठना पड़ा। वह जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं, क्योंकि थानों में पीड़ितों के खिलाफ ही केस दर्ज करके प्रताड़ित किया जा रहा है। जब तक एसपी को हटाया नहीं जाएगा उनका धरना जारी रहेगा।
बिजली काटने का आरोप
धरना के दौरान बुधवार सुबह करीब 6.30 बजे धरनास्थल की बिजली गुल हो गयी। विधायक ने धरनास्थल की बिजली जानबूझ कर काटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि डीएम से शिकायत के बाद दोपहर 12 बजे के करीब बिजली सप्लाई शुरू हुई। उन्होंने धरना स्थल के पास शौचालय आदि सुविधा उपलब्ध नहीं होने की भी शिकायत की। विधायक के साथ धरने में अधिवक्ता राकेश सिंह, निकुंज सिंह, जिला पंचायत सदस्य बच्चाराम, तेज प्रताप सिंह समेत अन्य समर्थक मौजूद रहे।
मृतक के परिजन बोले- राजनीति कर रहे विधायक
दूसरी तरफ विधायक विनय वर्मा शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम अकरा निवासी जिस मृत ट्रैक्टर ड्राइवर मायाराम को न्याय दिलाने के लिए धरने पर बैठे हैं उसके पिता दरशू व मां का एक वीडियो सोशल मीडिया पर अचानक वायरल हो गया है। वायरल वीडियो में माता-पिता कह रहे हैं कि वह पुलिस से कोई कार्रवाई नहीं चाह रहे है। माता-पिता विधायक पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि अमर उजाला उस वीडियो की पुष्टि नहीं करता।
बोले विधायक, झूठी थी पुलिस की सफाई
धरने पर बैठे विधायक विनय वर्मा का कहना है कि बस्ती में मुख्यमंत्री की समीक्षा के दौरान पुलिस की तरफ से बताया गया था कि मामले में केस दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया गया, जबकि मृतक के माता-पिता के बयान से साफ हो गया कि उस मामले में केस ही नहीं दर्ज किया गया था। आरोपी को दूसरे मामले में जेल भेजा गया था। इससे साफ हो गया कि मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में पुलिस की तरफ से सही जवाब नहीं दिया गया।