संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर दवा खा रहे हैं और असर नहीं कर रही है, तो समझ लीजिए दवा की गुणवत्ता कम है और दवा विक्रेता ने आपसे ब्रांडेड दवा की कीमत लेकर उसी कंपनी की जेनेरिक दवा दे दी है। जी हां!दवाओं की बिक्री में यह बहुत बड़ा खेल चल रहा है, जिसका लाभ छोटे दुकानदार कमा रह हैं।
दवा कंपनी का नाम और दाम लगभग एक ही होने के कारण मरीज भी समझ नहीं पाते हैं, और जब मरीज डॉक्टर को बताता है कि दवा ने असर नहीं किया तो वह दूसरी दवा लिख देते हैं। ब्रांड और जेनेरिक के बीच होने वाले खेल पर प्रशासन भी अंकुश नहीं लगा पा रहा है। इसलिए 20 रुपये पत्ता मिलने वाली दवा प्रिंट के अनुसार मरीज को 200 रुपये खुले तौर पर बेची जा रही है। मरीजों के साथ होने वाली इस ठगी पर विधि विशेषज्ञ और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोग रोक लगाने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि नामी कंपनी अगर जेनेरिक दवा बाजार में उतार रही है, तो ब्रांड नेम में बदलाव और वास्तविक मूल्य होना चाहिए, जिससे सरकार की सस्ती दवाएं मुहैया कराने की योजना सफल हो और जरूरतमंदों को लाभ मिले।
इस प्रकार से हो रहा है ब्रांड और जेनेरिक में खेल : एक ही कंपनी की ओर से बनाई जाने वाली ब्रांड और जेनेरिक दवाओं में खेल करके दुकानदार मोटी कमाई करते हैं। एक दवा कंपनी के प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दवाओं में बड़े पैमाने पर खेल होता है। दवा देते समय वे लोग खुद मेडिकल स्टोर संचालक को मुनाफे के बारे में जानकारी देते हैं। क्योंकि वह नामी कंपनी अब जेनरिक भी बना रही है और वही ब्रांड। नाम ब्रांड हूबहू और कमाई कई गुना, इसलिए दुकानदार उसे अधिक बेचते हैं। सेहत के लिए नुकसानदेह नहीं है। इसलिए शिकायत नहीं होती है। कंपनी और हमें चाहिए सेलिंग, जितनी सेलिंग उतनी मुनाफा, बाकी ब्रांड तो बिना कुछ कहे ही दुकानदार ले लेते हैं।
वहीं, एक मेडिकल स्टोर संचालक ने कहा कि नामी ब्रांड की जेनेरिक दवा बेचने में ठीक मुनाफा मिल जाता है। डॉक्टर के अलावा कोई इसे समझ भी नहीं सकता है। इसके बाजार में आने से मुनाफा बढ़ गया है।